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Hamirpur (Himachal) News: फॉल आर्मी वर्म से मक्की की फसल को बचाने के लिए विभाग सतर्क

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कृषि विभाग ने जिलाभर में सर्वे किया शुरू, कीटनाशक दवाइयां भेजीं
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जिले में दस फीसदी फसल कीट ने की तबाह
29000 हेक्टेयर एरिया पर होती है मक्की फसल की बुआई
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। जिलेभर में बारिश न होने से मक्की की 10 फीसदी फसल फाॅल आर्मी वर्म कीट की चपेट में आ गई है। वहीं, कीट से बचाव को लेकर कृषि विभाग ने जिलाभर में सर्वे शुरू कर दिया है। कीट से फसल को बचाने को लेकर कृषि विभाग ने कीटनाशक दवाइयों के माध्यम से किसानों को जागरूक करने का कार्य शुरू किया है। वर्तमान में जिलेभर में 29000 हेक्टेयर एरिया पर मक्की की फसल की बिजाई की जाती है लेकिन सूखे जैसे हालात और कीट के आतंक से किसान परेशान हैं। किसानों की सुविधा को लेकर कृषि विभाग ने ब्लॉक स्तर पर कीटनाशक दवाई कोराजेन पहुंचा दी है। कीटनाशक दवाइयों के प्रयोग को लेकर विभागीय अधिकारी फील्ड में जाकर निरीक्षण कर रहे हैं। ऐसे में किसानों को कीटनाशक दवाई कोराजेन का इस्तेमाल करने का माध्यम बताया जा रहा है।
खरीफ की फसलों में मक्की में फॉल आर्मी वर्म का अधिक प्रकोप दिखाई देता है। इसका अधिक प्रकोप होने पर यह कीट फसल को एक ही रात में भारी नुकसान पहुंच सकता है। इस कीट की व्यस्क मादा मोथ पौधों की पत्तियों और तनों पर अंडे देती है। एक बार में मादा 50-200 अंडे देती है। यह अंडे 3-4 दिन में फूट जाते हैं तथा इनसे निकलने वाले लार्वा 14-22 दिन तक इसी अवस्था में रहता है। कीट के लार्वा के जीवन चक्र की तीसरी अवस्था तक इसकी पहचान करना मुश्किल है, लेकिन चौथी अवस्था में इसकी पहचान आसानी से की जा सकती है। चौथी अवस्था में लार्वा के सिर पर अंग्रेजी के उल्टे वाई आकार का सफेद निशान दिखाई देता है। इसका लार्वा पौधों की पत्तियों को खुरचकर खाता है, जिससे पत्तियों पर सफेद धारियां दिखाई देती हैं। जैसे-जैसे लार्वा बड़ा होता है, पौधों की ऊपरी पत्तियों को खाता है और बाद में पौधों के भुट्टे में घुसकर अपना भोजन प्राप्त करता है। यह कीट बहु फसल भक्षी है, जो 80 से अधिक फसलों को नुकसान पहुंचाता है। अगर समय रहते फॉल आर्मी वर्म कीट की पहचान कर इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले समय में मक्की एवं अन्य फसलों में भारी तबाही हो सकती है। फसल के लिए लार्वा अवस्था हानिकारक होती है।
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इस बारे में कृषि उपनिदेशक हमीरपुर डॉ. शशिपाल अत्री ने कहा कि सूखे जैसे हालात के चलते मक्की की फसल पर कीट अधिक बढ़ रहा है। फसलों को बचाने के लिए लगातार फील्ड में निरीक्षण किया जा रहा है। किसानों को कीटनाशक दवाइयों का इस्तेमाल करने के बारे में प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि मक्की की फसल को बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि ब्लॉकों में किसानों की सुविधा के लिए कीटनाशक दवाइयां उपलब्ध करवा दी गई हैं।
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उपाय:
यदि 10 फीसदी से कम पौधों पर पिन के आकार के छोटे-छोटे सुराख पाए जाएं तो नीम से बनी दवाई पांच मिलीलीटर प्रति एक लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें व कम प्रकोप होने पर कीट ग्रसित पौधों को उखाड़कर भूमि की गहरी जुताई करें, ताकि कीट की लार्वा अवस्था या प्यूपा भूमि में गहरा दब जाए। यदि इसका प्रकोप 10 फीसदी से अधिक हो तो एमामैक्टिन बेंजोएट 5 एसजी 0.4 ग्राम प्रति एक लीटर पानी या क्लोर-एंट्रीनीलीप्रोल 18.5 एससी (कोरेजन) 0.4 मिली प्रति एक लीटर पानी में घोलकर फसल पर स्प्रे सुबह के शुरुआती घंटों या शाम के समय में करना चाहिए और स्प्रे नोजल को पत्ती भंवर की ओर रखा जाना चाहिए, जिसमें लार्वा आमतौर पर फीड करते हैं। मक्की की फसल में फूल आने और कटाई तक किसी भी कीटनाशक का प्रयोग न करें।
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