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मनरेगा मजदूरों को कल्याण बोर्ड से बाहर करने पर हमीरपुर में प्रदर्शन

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सीटू के बैनर तले मनरेगा मजदूरों की मांगों को लेकर हमीरपुर में रैली निकालते कामगार। - फोटो : Hamirpur-HP
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हमीरपुर। सीटू जिला कमेटी ने वीरवार को हमीरपुर बाजार में प्रदेश सरकार के खिलाफ विरोध रैली निकालते हुए जमकर प्रदर्शन किया। सरकार की ओर से मनरेगा मजदूरों को कल्याण बोर्ड से बाहर करने के फैसले के विरोध में जिला कमेटी की ओर से यह प्रदर्शन किया गया। इसमें सैकड़ों मनरेगा व भवन निर्माण मजदूरों ने भाग लिया।
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सीटू के महासचिव डॉ. कश्मीर ठाकुर ने कहा कि प्रदेश भर में 3,17,000 मजदूर कल्याण बोर्ड से पंजीकृत हैं। उसमें से 1,71,000 मजदूर मनरेगा के माध्यम से पंजीकृत हैं। उन्होंने कहा कि बोर्ड के इस फैसले से लाखों मनरेगा मजदूरों का भविष्य प्रभावित होगा। सीटू इस निर्णय के खिलाफ आर-पार की निर्णायक लड़ाई लड़ेगा और 12 अक्तूबर को प्रदेशव्यापी प्रदर्शन होगा।
इसमें जिले के गांव-गांव से मनरेगा मजदूर विरोध प्रदर्शन करेंगे। डॉ. ठाकुर ने कहा कि भाजपा सरकार मजदूरों के अधिकारों को कुचलकर सभी तरह के श्रम कानूनों को समाप्त कर रही है। उसी तर्ज पर अब निर्माण मजदूरों के लिए 1996 में बने मनरेगा के कानून को निशाना बनाया गया है। कहा कि दो वर्षों से हजारों मजदूरों के लाभ कल्याण बोर्ड की ओर से जारी नहीं किए जा रहे हैं और मजदूरों को अपने पैसों के लिए तरसना पड़ रहा है।
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मनरेगा को श्रमिक कल्याण बोर्ड से बाहर करने का फैसला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सीटों के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ेगा और भाजपा की सरकार को सत्ता से बेदखल किया जाएगा। इस मौके पर सीटू जिला सचिव योगेंद्र कुमार, जिला अध्यक्ष प्रताप राणा, बिजली बोर्ड कर्मचारी संघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप खरबाड़ा, हिमाचल प्रदेश भवन निर्माण के जिला सचिव रंजन शर्मा, धर्म सिंह, जितेंद्र आदि लोग मौजूद रहे। प्रदर्शन के बाद जिला प्रशासन के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री को मनरेगा मजदूरों के हित में निर्णय को वापस लेने के लिए ज्ञापन भेजा गया।
देश की संपत्तियों को कौड़ियों के भाव बेच रही सरकार : कुलदीप
प्रदेश बिजली बोर्ड कर्मचारी संघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप खरबाड़ा ने कहा कि केंद्र में बैठी भाजपा सरकार देश की संपत्तियों को अंबानी और अदानी समेत निजी हाथों में कौड़ियों के भाव बेच रही है। किसानों, महिलाओं और बागवानों के कल्याणार्थ चल रही योजनाओं को एक षड्यंत्र के तहत बंद किया जा रहा है। देश के बिजली क्षेत्र को निजी हाथों में नीलाम करने का प्रयास चल रहा है। 2014 में सत्ता में आते ही भाजपा सरकार ने मजदूरों से नफरत का परिचय देते हुए मनरेगा स्कीम को पहले बंद करने का प्रयास किया और बाद में इस स्कीम के तहत बजट को कम कर दिया। दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने सत्ता हथियाने के बाद मुफ्त में बिजली देने के निर्णय को वापस ले लिया है। अब हिमाचल सरकार भी 125 यूनिट फ्री बिजली का लॉलीपॉप देकर मिशन रिपीट करना चाहती है।
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