हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश राज्य खाद्य आपूर्ति निगम को घटिया क्वालिटी के चावलों की सप्लाई की मूल्य वापसी फाइलों में उलझकर रह गई है। कृषि विभाग के तहत संचालित जाइका परियोजना के प्रथम चरण के तहत हुई खरीद-फरोख्त को लेकर अभी तक फाइलों में अधिकारी उलझ रहे हैं।
जाइका ने अभी तक खाद्य आपूर्ति निगम को चावलों की मूल्य वापसी नहीं की है। हालात ऐसे हैं कि जाइका के तहत निर्मित कंपनी, जिसकी ओर से चावल सप्लाई किए गए थे, उसकी ओर से निगम को जवाब तक नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में निगम की ओर से जाइका के परियोजना निदेशक को पत्राचार किया गया है। हालांकि इस पत्राचार का भी कोई खासा असर नहीं हुआ है।
दरअसल जाइका-1 के तहत निर्मित हिमाग्री विजन प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (हवि) की ओर से खाद्य आपूर्ति निगम को चावल सप्लाई किए गए थे। इस कंपनी में 40 से 50 शेयरधारक शामिल थे। इस कंपनी के जरिये किसानों से खाद्य खरीद कर उपभोक्ताओं को सप्लाई किए जा रहे थे। इस कड़ी में खाद्य आपूर्ति निगम को कई तरह के खाद्य सप्लाई किए गए। वहीं, चावल की सप्लाई के दौरान क्वालिटी सही नहीं पाई गई तो निगम ने कंपनी को सप्लाई लौटा दी।
कुल 47 क्विंटल चावल जांच में सही नहीं पाए गए थे। इसके बाद कोरोना काल शुरू हो गया और कंपनी ने कार्य करना बंद कर दिया। निगम की ओर से लगातार कंपनी से पत्राचार किया जाता रहा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अंत में निगम ने जाइका के परियोजना निदेशक को पत्र लिखकर चावलों के मूल्य वापसी की मांग उठाई है। हालांकि चार वर्ष बाद भी कोई संतोषजनक जवाब निगम को नहीं मिला है।
कोट
जाइका के परियोजना निदेशक को पत्राचार किया गया है। कुल 47 क्विंटल चावल की मूल्य वापसी की जानी है। चावलों की कीमत 1,33,700 रुपये बनती है।
-संजीव वर्मा, एरिया मैनेजर, खाद्य आपूर्ति निगम हमीरपुर
यह जाइका के प्रथम चरण के तहत निर्मित कंपनी से जुड़ा मामला है। मामले में जानकारी जुटाकर नियमों के तहत आगामी कार्यावाही की जाएगी।
-सुनील चौहान, परियोजना निदेशक, जाइका