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Hamirpur (Himachal) News: भोटा में कांग्रेस ने खामोशी से साधी चुनावी उलझन, भाजपा में बगावत की चिंगारी

Sun, 03 May 2026 01:08 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
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भोटा (हमीरपुर)। नगर पंचायत भोटा के चुनावी रण में इस बार कांग्रेस ने खामोशी से चुनावी उलझन को कुछ हद तक साधा है, जबकि भाजपा को अपने ही कुनबे में बगावत का सामना करना पड़ रहा है।
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कांग्रेस ने इस बार पार्टी समर्थित प्रत्याशियों की कोई औपचारिक सूची जारी नहीं की है, लेकिन अंदरखाते ऐसा तालमेल बनाया कि एक वार्ड से पार्टी विचारधारा का केवल एक ही चेहरा मैदान में उतरे।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस और व्यापार मंडल के बीच बेहतर समन्वय के चलते यह रणनीति नामांकन प्रक्रिया में कम से कम बगावत से बचने का कारगर जरिया बनी है।
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दूसरी तरफ भाजपा ने बाकायदा प्रेस नोट जारी कर अपने समर्थित प्रत्याशियों की घोषणा की, लेकिन अब उसी सूची के खिलाफ पार्टी के भीतर से बगावत खुलकर सामने आ गई है। खास बात यह है कि बगावत करने वाले वही चेहरे हैं, जिनके परिवार के सदस्य भाजपा समर्थित उम्मीदवार के तौर पर दूसरे वार्डों से मैदान में हैं।

भाजपा के समर्थन से पिछले चुनाव में जीत दर्ज करने वाले पूर्व उपाध्यक्ष संजय धीमान ने अपनी ही पार्टी समर्थित प्रत्याशी के खिलाफ चुनावी ताल ठोक दी है। वार्ड नंबर-7 में भाजपा समर्थित उम्मीदवार अनिल धीमान हैं, लेकिन वार्ड नंबर-5 से भाजपा समर्थित प्रत्याशी ज्योति धीमान के पति और पूर्व उपाध्यक्ष संजय धीमान ने भी चुनावी मैदान में उतरकर पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
अब सबकी नजर 6 मई दोपहर 3 बजे तक नामांकन वापसी की प्रक्रिया पर टिकी है। यदि संजय धीमान चुनाव मैदान में डटे रहते हैं, तो भोटा में भाजपा के चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। वहीं, कांग्रेस की खामोश रणनीति फिलहाल चर्चा का केंद्र बनी हुई है।

पूर्व अध्यक्ष का नामांकन भी चर्चा में
पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष भाजपा नेत्री सपना सोनी ने वार्ड नंबर पांच से परचा भरा है। इसी वार्ड से भाजपा ने ज्योति धीमान को समर्थन दिया है। ज्योति धीमान पूर्व उपाध्यक्ष संजय धीमान की पत्नी हैं, जो कि भाजपा समर्थित प्रत्याशी के खिलाफ वार्ड नंबर सात से आजाद चुनाव में उतरे हैं। दूसरी ओर वार्ड नंबर-2 से भाजपा समर्थित उम्मीदवार अश्वनी सोनी हैं, जो सपना सोनी के पति हैं। हालांकि सपना सोनी का कहना है कि उन्होंने पार्टी के आदेशों पर कवरिंग प्रत्याशी के रूप में परचा भरा है। पार्टी के आगामी आदेशों पर नामांकन वापसी का निर्णय होगा।

चुनाव से ठीक पहले भाजपा में शामिल हुए थे संजय
वर्ष 2020 में नगर निकाय से ठीक पहले संजय धीमान भाजपा में शामिल हुए थे। भाजपा के समर्थन से वह पार्षद बने और फिर पांच साल उपाध्यक्ष पद पर काबिज रहे। इस बार उन्हें पार्टी से समर्थन नहीं मिला, तो उन्होंने आजाद प्रत्याशी के रूप में परचा भरा है। संजय धीमान का कहना है कि वह चुनाव से पीछे नहीं हटेंगे।
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