हमीरपुर। केंद्र सरकार द्वारा लागू की जा रही नई श्रम संहिताओं के खिलाफ शुक्रवार को सीटू के बैनर तले मजदूरों ने जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की अखिल भारतीय हड़ताल के आह्वान पर आयोजित किया गया। मजदूर तहसील परिसर के पास एकत्र हुए और गांधी चौक तक रैली निकालकर मोदी सरकार की नीतियों के विरोध में नारेबाजी की।
सीटू के राष्ट्रीय सचिव डॉ. कश्मीर ठाकुर, जिला अध्यक्ष प्रताप राणा, जिला सचिव जोगिंद्र कुमार, रंजन शर्मा, संतोष कुमार व राजकुमारी ने कहा कि मोदी सरकार श्रमिकों के हितों की अनदेखी कर कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुंचा रही है। सरकार पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर चार नई श्रम संहिताएं लागू करना चाहती है, जिनमें मजदूरों के हक छीनने के प्रावधान हैं।
उन्होंने कहा कि नई श्रम संहिताएं मजदूरों को गुलाम बनाने जैसी हैं। इसमें काम के घंटे बढ़ाकर 12 करने, हड़ताल पर पाबंदी, सजा और जेल की व्यवस्था की गई है। इस मौके पर हिमाचल भवन सड़क एवं अन्य निर्माण मजदूर यूनियन, आंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन, मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन, धौलासिद्ध प्रोजेक्ट वर्कर्स यूनियन, रेहड़ी वर्कर्स यूनियन समेत अन्य यूनियनों के सदस्य उपस्थित रहे।
सार्वजनिक संपत्तियों का निजीकरण बंद हो
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार बंदरगाहों, राष्ट्रीय राजमार्गों, बैंक, बीमा, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, बिजली और पानी जैसी जनसुविधाओं को निजी हाथों में सौंपने का रोडमैप बना चुकी है। रोजगार के नाम पर अंशकालिक भर्तियां की जा रही हैं और सामाजिक सुरक्षा योजनाएं खत्म की जा रही हैं।
ये हैं प्रमुख मांगें
- नई श्रम संहिताओं को रद्द किया जाए
- देश की सार्वजनिक संपत्तियों का निजीकरण बंद किया जाए
- सभी मजदूरों को 26,000 रुपये मासिक न्यूनतम वेतन मिले
- 60 वर्ष की आयु के बाद 10,000 रुपये पेंशन सुनिश्चित की जाए
सीटू के बैनर गांधी चौक पर विरोध प्रदर्शन करती विभिन्न यूनियन के पदाधिकारी व अन्य। संवाद