हमीरपुर। जिले के स्कूलों में नए सत्र से प्री-प्राइमरी कक्षाओं के लिए दोपहर के भोजन में पौष्टिक आहार शामिल होगा। इसमें बच्चों को दलिया, खिचड़ी, फल, सेवइयां, अंकुरित चने आदि परोसे जाएंगे। वर्तमान मेेें जिले के स्कूलों में अध्यापक खुद अपनी जेब से राशि खर्च कर छोटे बच्चों के लिए राशन ला रहे हैं। इससे कई स्कूलों में बच्चों की संख्या अधिक होने और कहीं-कहीं एक अध्यापक होने से काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सत्र 2022-23 के लिए प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने स्कूलों से डाटा एकत्रित कर लिया है। अब प्री-प्राइमरी कक्षाओं के लिए दोपहर के भोजन में पौष्टिक आहार को शामिल किया जाएगा। प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने बजट स्वीकृति के लिए शिक्षा निदेशालय को प्रस्ताव भेजा है। इस संबंध में प्रारंभिक शिक्षा विभाग के उपनिदेशक संजय ठाकुर ने कहा कि कोरोना के दो वर्ष के बाद स्कूलों में बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान में शिक्षक स्वयं खर्च कर प्री प्राइमरी कक्षाओं के पोषक आहार उपलब्ध करवा रहे हैं। इससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिले के स्कूलों से डाटा वेरिफाई करके शिक्षा निदेशालय भेज दिया गया है। बजट आते ही स्कूलों में राशि का आवंटन कर दिया जाएगा।
ढाई साल में योजना पर इतनी राशि हुई खर्च
जिले में 416 प्राइमरी स्कूल हैं। जहां पर 15,999 विद्यार्थी दाखिल हैं। वहीं, 116 माध्यमिक स्कूलों में 12,711 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इन सभी विद्यार्थियों को प्रतिदिन दोपहर का भोजन परोसा जाता है। शिक्षा विभाग की ओर से कोरोना महामारी के दौरान स्कूल बंद रहने पर वर्ष 2019-20 में 4.47 करोड़ रुपये, 2020-21 में 4.61 करोड़ रुपये खर्च कर बच्चों को घरों में मिड-डे मील योजना के तहत सूखा राशन उपलब्ध करवाया गया। सत्र 2021-22 में कुछ समय तक स्कूल बंद रहने पर भी विभाग की ओर से मिड-डे मील योजना पर चार करोड़ से अधिक रुपये खर्च किए जा चुके हैं।