मेडिकल कालेज हमीरपुर के नेत्र ओपीडी वार्ड में मरीजों का लगा हुआ जमावड़ा और उनकी आंखो की जांच कर
हमीरपुर। मोतियाबिंद की बीमारी को अकसर उम्र से जोड़ कर देखा जाता है। अधिक उम्र में आंखों का यह रोग सामान्य लिया जाता है, लेकिन कम उम्र में भी अब मोतियाबिंद के मामले सामने आने लगे हैं।
विशेषज्ञ इसकी वजह कुछेक रोगों के निदान में इस्तेमाल होने वाली स्टेरॉयड दवाइयों को मान रहे हैं। विशेषज्ञों का कहा है कि स्टेरॉयड दवाओं की वजह से कम उम्र के मधुमेह पीड़ित को भी मोतियाबिंद हो रहा है। मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) हमीरपुर के नेत्र रोग विशेषज्ञ अनिल वर्मा ने कहा कि चिंता की बात यह है कि कई मरीजों को इसका अंदाजा भी नहीं होता है। लोग इसे हल्के में ले रहे हैं, लेकिन यह आंखों की रोशनी के लिए घातक है।
इसके अलावा जोड़ों के दर्द से पीड़ित लोगों में भी बुढ़ापा आने से पहले ही मोतियाबिंद के लक्षण पनपने लगते हैं। जोड़ों के दर्द में मरीज स्टेरॉयड का इस्तेमाल करते हैं तो उनमें मोतियाबिंद का खतरा अधिक होता है।
लगातार स्टेरॉडल के इस्तेमाल से इन रोगियों को धुंधला दिखना शुरू हो जाता है और इसके बाद धीरे-धीरे मोतिया बढ़ता जाता है। इस तरह के लक्षण 60 साल की उम्र के बाद बुजुर्गों में पनपने शुरू होते हैं।
एक महीने में 2500 तक पहुंची ओपीडी
राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के नेत्र रोग विभाग में नवंबर में दैनिक ओपीडी औसतन 160 के करीब पहुंच गई है। नवंबर महीने में इस बार ओपीडी 2500 के करीब पहुंच गई है, जबकि वर्ष 2022 में नवंबर यह 2000 के करीब रहती थी। सर्दियों में नवंबर में मोतियाबिंद का ऑपरेशन करवाने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़कर 146 के ऊपर पहुंच गई है। पूर्व में यह 140 के करीब रहती थी। नेत्र विभाग ने जिला मेें मोतियाबिंद के 1200 ऑपरेशन करने का लक्ष्य रखा है। इसमें से आधे से ज्यादा लक्ष्य पूरा कर लिया गया है।
सर्दियों में कम रहती है संक्रमण की संभावना
सर्दियों के मौसम में अकसर नेत्र रोग विशेषज्ञ मोतियाबिंद के ऑपरेशन करते हैं। मरीज भी सर्दियों के मौसम में ही मोतियाबिंद के ऑपरेशन करना उचित समझते हैं। इस मौसम में आंख में संक्रमण होने की संभावनाएं कम रहती हैं और घाव भी तेजी से ठीक होते हैं।