शिविर के दौरान गाजर घास उखाड़ते एनएसएस स्वयंसेवी। -स्रोत: संस्थान
रंगस (हमीरपुर)। उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय नेरी में सात दिवसीय एनएसएस शिविर का सोमवार को समापन हुआ। समापन समारोह में महाविद्यालय के डीन डॉ. धर्मपाल शर्मा मुख्यातिथि रहे। उन्होंने स्वयंसेवियों को समाज सेवा के लिए प्रेरित किया और अपनी भूमिका को प्रभावी ढंग से निभाने के लिए कहा। इससे पहले स्वयंसेवियों ने क्षेत्र में अभियान चलाकर गाजर घास को भी उखाड़ा।
डॉ. धर्मपाल शर्मा ने कहा कि आजकल हमारे आसपास एक विशेष पौधे तैयार हुआ है। यह पौधा गाजर के पौधे जैसे दिखता है, जिस कारण इसे गाजर घास भी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि सड़कों, रेलवे लाइन के किनारे, घासनियों, खेतों के आसपास उगले वाला गाजर घास किसानों की कृषि व्यवस्था को भी बुरी तरह से प्रभावित करता है।
उन्होंने कहा कि गाजर घास गंभीर बीमारियों जैसे अस्थमा, एलर्जी, चर्म रोग, चक्कर आने और जान जाने की कारण भी बन सकता है। इसके कारण लोगों का जीवन भी प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि गाजर घास के उन्मूलन का एक मात्र हल इसे फूल आने से पहले ही जड़ से उखाड़ फेंकना है। इस मौके पर डॉ. संतोष, डॉ. नरेश ठाकुर, अजीत शर्मा, डॉ. वंदना, डॉ. कुमारी वंदना, डॉ. रविंद्र, डॉ. अभिषेक ठाकुर और डॉ. हिमानी शर्मा आदि उपस्थित रहे।