प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों में कक्षा एक से दसवीं तक मिलने वाली पाठ्य पुस्तकों के वितरण को लेकर शिक्षा विभाग और हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड में घमासान मच गया है।
पाठ्य पुस्तकों को स्कूल शिक्षा बोर्ड के डिपो से गाड़ियों में लोड और अनलोड करने व गाड़ियों का खर्च उठाने के मामले को लेकर दोनों विभाग आमने-सामने हैं। स्कूल शिक्षा बोर्ड तर्क दे रहा है कि उनकी जिम्मेवारी पाठ्य पुस्तकों की प्रिंटिंग तक सीमित है। जबकि स्कूलों में पुस्तकों का आवंटन शिक्षा विभाग ने करना है।
वहीं शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पाठ्य पुस्तकों को सेल डिपो से गाड़ियों में लोडिंग और अनलोडिंग का खर्चा न मिलने के कारण इस कार्य को अंजाम देना मुश्किल हो रहा है। मजदूरों का भुगतान किस हैड से किया जाएगा, यह भी स्पष्ट नहीं है। जिसके चलते हमीरपुर जिले के स्कूलों के लिए आई पाठ्य पुस्तकें शिक्षा बोर्ड के सेल डिपो हथली खड्ड में धूल फांक रही हैं।
बीते वर्ष मेधावी छात्रों को मिलने वाले लैपटॉप के वितरण में भी आने वाले खर्च के भुगतान में दिक्कतें आई थीं। स्कूलों में किताबें पहुंचाने की जिम्मेवारी खंड स्रोत समन्वयकों और खंड शिक्षा अधिकारियों को दी गई है। जिले में 86 से अधिक राजकीय उच्च पाठशालाएं, 480 प्राथमिक पाठशालाएं और 119 माध्यमिक पाठशालाएं हैं। वहीं अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होना है। नया सत्र शुरू होने से पहले किताबों को स्कूलों में उपलब्ध करवाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
उधर, प्रारंभिक शिक्षा विभाग के उपनिदेशक आरसी कटोच ने कहा कि नया सत्र शुरू होने से पहले स्कूलों तक किताबें पहुंचा दी जाएंगी। लोडिंग और अनलोडिंग के खर्चे का संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों और बीआरसी को केस बनाकर शिक्षा निदेशालय भेजना पड़ेगा, जिसके बाद खर्चे का भुगतान उनके पक्ष में होगा।