बारिश में टपकती है पुराने भवन की छत, कक्षा कक्ष बन रहे तालाब
विद्यार्थियों को हो रही दिक्कत
बीते वर्ष बारिश से गिर गई है स्कूल की सुरक्षा दीवार
स्कूल में प्री-प्राइमरी से पांचवीं कक्षा तक 50 विद्यार्थी हैं दाखिल
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। राजकीय प्राथमिक पाठशाला बफड़ी में नौनिहाल खतरे के साये में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। हालात ऐसे हैं कि स्कूल में एक वर्ष पूर्व गिरी चहारदीवारी और खेल मैदान की मरम्मत के लिए अभी तक बजट जारी नहीं हो पाया है। स्कूल के भवन का निर्माण वर्ष 1962 में हुआ है और वर्तमान में स्कूल भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। जबकि, छत पर डले स्लेट भी टूट चुके हैं। हल्की सी बारिश होने पर स्कूल के सभी कमरों में पानी भर जाता है। इससे विद्यार्थियों को पढ़ाई करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में प्राथमिक स्कूल में आसपास के चार से पांच गांवों के 50 विद्यार्थी प्री-प्राइमरी से पांचवीं कक्षा तक दाखिल हैं।
स्कूल में भवन की उचित व्यवस्था न होने से शिक्षक चाहकर भी विद्यार्थियों को गतिविधियों के माध्यम से नहीं पढ़ा पा रहे हैं। अभिभावकों महेंद्र लाल, रीना कुमारी, ललिता, सुमित, सुनील कुमार, संजीव ठाकुर, पंजाब सिंह, सुमना, कमलेश, मीनाक्षी, चंचला देवी, रिंकू कुमारी, दीक्षा ठाकुर आदि ने कहा कि शिक्षा विभाग और प्रदेश सरकार की विभिन्न गतिविधियों को ध्यान में रखकर उन्होंने स्कूल में अपने बच्चों को दाखिल करवाया है लेकिन स्कूल भवन की हालत खस्ताहाल बनी हुई है। अवगत करवाने पर भी विभागीय अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं। स्कूल में विद्यार्थियों को बैठाने के लिए कोई अतिरिक्त कमरा भी नहीं है। ऐसे में बरसात के समय स्कूल में जर्जर भवन के कारण कोई भी दुर्घटना हो सकती है। स्कूल की चहारदीवारी पिछली बरसात से जर्जर पड़ी हुई है जो अब बारिश के साथ धीरे-धीरे और जर्जर होती जा रही है। वे स्कूल प्रबंधन समिति के माध्यम से कई बार शिक्षा विभाग को लिखित रूप में अवगत करवा चुके हैं लेकिन विद्यार्थियों के लिए भवन की कोई भी सही व्यवस्था नहीं हो पाई है। स्कूल में विद्यार्थी खतरे के साये में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। स्कूल भवन कभी भी जोरदार बारिश के कारण गिर सकता है। उन्होंने शिक्षा विभाग से स्कूल भवन निर्माण कार्य के लिए बजट राशि उपलब्ध करवाने की मांग की है। इस बारे में स्कूल के मुख्य शिक्षक विनोद कुमार ने कहा कि स्कूल का भवन बहुत पुराना है। स्कूल में जर्जर भवन के नीचे विद्यार्थियों को पढ़ाई करवाना किसी खतरे से कम नहीं है। बारिश के दौरान कक्षा कक्षों में पानी भी भर जाता है। इससे अध्यापकों और विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।