विकास खंड नादौन के तहत किटपल में मधुमक्खी के बॉक्स के साथ अशोक कुमार। स्रोत स्वयं
हमीरपुर। विकास खंड नादौन के किटपल गांव के अशोक कुमार शहद उत्पादन के जरिए अपनी आर्थिकी को मजबूत कर रहे हैं। नौकरी की तलाश में भटकने के बजाय उन्होंने गांव में ही स्वरोजगार का रास्ता चुना और आज वे मधुमक्खी पालन से हर महीने 10 से 12 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं।
करीब पांच वर्ष पहले उन्होंने मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण लिया था। इसके बाद 15 बॉक्स के साथ इस व्यवसाय की शुरुआत की। मेहनत और अनुभव के बल पर उन्होंने धीरे-धीरे बॉक्सों की संख्या बढ़ाकर करीब 25 तक पहुंचा दी, जिससे शहद उत्पादन और आमदनी दोनों में वृद्धि हुई है।
अशोक कुमार ने बताया कि उन्हें अपने बड़े भाई से प्रेरणा मिली, जो लंबे समय से मधुमक्खी पालन से जुड़े हैं। शुरुआत में कई चुनौतियां आईं, खासकर मौसम के अनुसार मधुमक्खियों को उपयुक्त स्थानों पर ले जाना, ताकि उन्हें पर्याप्त फूलों का रस मिल सके। इसके लिए परिवहन और देखभाल में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है।
उन्होंने बताया कि बाजार में शुद्ध शहद की अच्छी मांग है और गुणवत्ता के अनुसार एक बोतल 500 से 600 रुपये तक बिक जाती है। अशोक का कहना है कि मेहनत और लगन से किया गया स्वरोजगार आत्मनिर्भर बनने का मजबूत माध्यम है।