हमीरपुर। बदलते समय के साथ जहां महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं भी अब आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूती से कदम आगे बढ़ा रही हैं।
घयोटा गांव की अनुराधा ने मैक्रेम कला को अपनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। कुछ समय पहले अनुराधा एक सामान्य गृहिणी की तरह अपने घर-परिवार की जिम्मेदारियों में व्यस्त रहती थीं। इसी दौरान उन्होंने सोशल मीडिया और इंटरनेट के माध्यम से मैक्रेम कला के बारे में जाना।
शुरुआत में उन्होंने घर पर उपलब्ध साधनों से अभ्यास शुरू किया और यू-ट्यूब में वीडियो के जरिए इस कला की बारीकियां सीखीं। शुरुआती दौर में कई बार उनके बनाए उत्पाद अपेक्षा के अनुसार नहीं बने, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। लगातार अभ्यास और मेहनत के बल पर उन्होंने इस कला में दक्षता हासिल कर ली।
इसके बाद अनुराधा ने छोटे-छोटे सजावटी उत्पाद जैसे वॉल हैंगिंग, की-चेन, प्लांट हैंगर और डेकोरेटिव आइटम बनाना शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने अपने उत्पादों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी साझा कीं, जिससे उन्हें ऑर्डर मिलने लगे।
बढ़ती मांग को देखते हुए उन्होंने अपने काम का विस्तार किया और नए डिजाइन तैयार करने शुरू किए। अब वे मैक्रेम के जरिए बैग, पर्दे, टेबल डेकोर, गिफ्ट आइटम सहित कई उपयोगी उत्पाद भी बना रही हैं।
अनुराधा अब अपने हस्तनिर्मित उत्पादों से हर महीने लगभग 8 से 10 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। इससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि उनका आत्मविश्वास और आत्मसम्मान भी बढ़ा है।
अनुराधा बताती हैं कि शुरुआत में उन्हें परिवार और समाज से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला, लेकिन अब उनकी सफलता देखकर गांव की अन्य महिलाएं भी प्रेरित हो रही हैं। वे कई महिलाओं को मैक्रेम कला सिखाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी कार्य कर रही हैं।