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अमर उजाला शिक्षा अभियान : ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों में लगी फोन की लत छुड़ा रहे शिक्षक

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Amar Ujala Education Campaign: Teachers who are getting rid of phone addiction among children through online studies
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हमीरपुर। कोविड-19 के चलते दो साल घरों में रहे बच्चों की पढ़ाई की भरपाई के साथ-साथ अब उनके व्यक्तित्व विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। घरों में ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों में फोन की लत लग गई है। इसे छुड़ाने का प्रयास शिक्षक कर रहे हैं। गूगल से प्रश्न हल करने से भी बच्चों के बौद्धिक स्तर पर असर पड़ा है।
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अब स्कूलों में अध्यापक बच्चों में आए बदलावों को ठीक करने में प्रयासरत हैं। दो साल घरों पर ऑनलाइन पढ़ाई के बाद स्कूल पहुंचे बच्चों के स्वास्थ्य और दीमाग पर खासा असर पड़ा था। कमरों में बंद रहने के कारण बच्चे मानसिक दबाव, चिड़चिड़ापन जैसी कई बीमारियों से घिर गए थे। स्कूल खुलने के बाद अध्यापकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बच्चों में आए इस बदलाव को बदलना है। अब स्कूलों में बच्चों से अनेक गतिविधियां करवाई जा रही हैं। इससे बच्चों में स्कूल आने में उत्साह बढ़ा है।
प्रतिस्पर्धा की भावना भी जागृत हुई है। परीक्षाओं से बच्चों को तनाव से बचने के लिए अध्यापक सफल व्यक्तियों की जीवनियों और उनके इतिहास के बारे में बताकर विद्यार्थियों के व्यक्तित्व में विकास लाने का प्रयास कर रहे हैं। स्कूलों में अतिरिक्त कक्षाएं लगाकर अध्यापक बच्चों में आत्मविश्वास भर रहे हैं।
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उधर, उच्च शिक्षा विभाग के उपनिदेशक दिलबर जीत चंद्र का कहना है कि स्कूलों में बच्चों की काउंसलिंग के लिए कहा गया है। स्कूल अध्यापक इस पर कार्य करने में जुटे हुए हैं।
-क्या कहते हैं अध्यापक
बच्चों की करवाई कॅरियर काउंसलिंग : विजय
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कन्या हमीरपुर के प्रधानाचार्य विजय गौतम ने कहा कि कोरोना के बाद स्कूल पहुंचे बच्चों में कई बदलाव देखने को मिले। इसके चलते बोर्ड कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए कॅरियर काउंसलिंग की गई। कॅरियर को लेकर गाइड किया गया, जो बच्चे नियमित रूप से स्कूल नहीं आ रहे थे, उन्हें स्कूल आने के लिए प्रेरित किया गया। साथ में कोरोना के दौरान छूटी पढ़ाई को पूरा करने के लिए अतिरिक्त कक्षाएं लगाई गईं ताकि विद्यार्थी तनाव मुक्त होकर परीक्षाएं दे सकें।
बच्चों को सीखाया जा रहा अनुशासन : आशा
कन्या स्कूल हमीरपुर की शिक्षक आशा पटियाल का कहना है कि दो साल ऑनलाइन कक्षाओं में बच्चों में अनुशासन की कमी आई है। इसे सुधारने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है, ताकि बच्चों का सही रूप में विकास हो सके। ऑफलाइन कक्षाओं में बच्चों से सीधा संवाद करके फीडबैक ली जा रही है। इससे बच्चों को विषयों को ग्रहण करने में आसानी होती है।
फोन की लत छुड़ाई जा रही : सुधीर
शिक्षक सुधीर शर्मा का कहना है कि दो साल घरों में ऑनलाइन पढ़ाई करने के बाद बच्चों को फोन की लत लग गई है। इससे धीरे-धीरे सुधारा जा रहा है। ऑनलाइन कक्षाओं में बच्चे प्रश्न गूगल से हल करवा रहे हैं। इससे बच्चों में सोचने की क्षमता पर भी बुरा प्रभाव पड़ा है। इसी के चलते स्कूल में बच्चों को फोन लाने के लिए मना किया गया है। इसके चलते प्रतिदिन कक्षाओं में बच्चों की बैग चेकिंग की जा रही है।
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