अमर उजाला ब्यूरो
हमीरपुर। हिमाचल शिक्षक मंच ने प्रदेश सरकार की ओर से ट्रिब्यूनल को बंद करने के निर्णय का स्वागत और समर्थन किया है। मंच के प्रदेश संयोजक अश्वनी भट्ट, संजय मोगू, विजय शमशेर भंडारी, सुनील राजपूत और तपिष थापा ने कहा कि ट्रिब्यूनल बंद होने से कर्मचारियों से जुड़े विषयों पर अब त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित हो सकेगी। इस उद्देश्य के लिए इसकी स्थापना की गई थी, इसमें यह अपेक्षित सफलता नहीं प्राप्त कर पाया। सेवानिवृत्त नौकरशाहों को इसमे स्थापित किया जाता रहा, जबकि इसमें न्यायिक सेवा के लोगों को शामिल किया जाना चाहिए था। ट्रिब्यूनल के निर्णयों पर विभाग और सरकार भी गंभीरता से त्वरित कार्रवाई नहीं करती थी। इस कारण अपीलकर्ता को उच्च न्यायालय की ही शरण लेनी पड़ती थी। इससे उसे दोहरा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था।
प्रदेश के अधिकतर कर्मचारी संगठन इसके खिलाफ थे। शिक्षक मंच ने भी समय-समय पर इसमें आवश्यक सुधारों की बात उठाई थी। पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश में इतने बड़े प्रशासनिक अमले और राजनीतिक नेतृत्व के बावजूद कर्मचारियों के मामलों का हजारों की संख्या में न्यायालय में लंबित होना चिंता का विषय है। बहुत सारे विषयों पर जब कर्मचारी अपनी तार्किक बात रखते हैं और उस पर ध्यान नहीं दिया जाता, तब कर्मचारियों को मजबूरन न्यायालय की शरण में जाना पड़ता है। मंच ने मांग उठाई है कि प्रदेश के कर्मचारियों की मांगों के लिए विभागीय व्यवस्थाओं को और ज्यादा सुदृढ़ किया जाए। ताकि, कर्मचारियों को न्यायालय की शरण ही न लेनी पड़े। प्रदेश के सभी कर्मचारियों के लिए संयुक्त सलाहकार समिति की बैठकों को प्रति छह माह में आयोजित करवाया जाए ताकि, कर्मचारियों के मामले वहीं निपट सकें और न्यायालयों पर बोझ भी कम हो पाए।