धोखे से शपथ पत्र बनवा नगर परिषद की दुकान की सौदेबाजी
बेटे के मणिमहेश जाते ही पिता से बनवा लिया दुकान का एग्रीमेंट
50000 देकर एग्रीमेंट में की 7 लाख की एंट्री
शहर के वार्ड नंबर-6 में पेश आया अवैध सौदे का मामला
नियमानुसार नप की दुकान की नहीं हो सकती बिक्री और सबलैटिंग
अमर उजाला ब्यूरो
हमीरपुर। नगर परिषद हमीरपुर में अवैध तरीके से एक दुकान की सौदेबाजी का मामला सामने आया है। पीड़ित दुकानदार ने इस मामले की शिकायत नगर परिषद हमीरपुर में की है। दुकानदार का आरोप है कि कुछ साल पहले नगर परिषद हमीरपुर ने शहर में अस्थायी दुकानों का निर्माण करवाया। इसके बाद शहर में रेहड़ी-फड़ी लगाकर कारोबार करने वाले दुकानदारों को नगर परिषद ने यह दुकानें आवंटित कर दी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि गत दिनों वह मणिमहेश यात्रा पर जिला चंबा गया हुआ था। जिसके चलते करीब एक हफ्ता दुकान बंद रही। शिकायतकर्ता चंदन का आरोप है कि यह दुकान नगर परिषद ने उनके बुजुर्ग पिता को आवंटित की थी। कुछ साल पिता ने नगर परिषद की ओर से बनाई गई दुकान में कारोबार करके परिवार का भरण पोषण किया।
लेकिन, बीते तीन सालों से उनके पिता काफी बीमार रह रहे हैं। जिसके चलते अब वह खुद दुकान पर काम करते हैं। उन्होंने कहा कि जब मणिमहेश यात्रा पर जिला चंबा गए हुए थे तो एक व्यक्ति ने उनके पिता से एक शपथ पत्र पर धोखे से हस्ताक्षर करवा लिए और दुकान को अपने नाम करवा लिया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि संबंधित व्यक्ति ने उनके पिता को करीब 50000 रुपये दुकान की एवज में दिए हैं। जबकि एग्रीमेंट में करीब सात लाख रुपये की रकम एंट्री करवाई गई है। पीड़ित दुकानदार ने नगर परिषद को लिखित में शिकायत पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। वहीं दुकानदार का कहना है कि उन्होंने इस बारे में पुलिस थाना हमीरपुर में भी शिकायत देने का प्रयास किया। लेकिन, पुलिस ने यह मामला नगर परिषद का होने के चलते कोई कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। नगर परिषद हमीरपुर के वार्ड नंबर-6 के पार्षद अश्विनी कुमार शर्मा ने कहा कि यह दुकान नगर परिषद ने आवंटित की थी। उन्होंने कहा कि दुकानदार की शिकायत मिली है। जिसमें दुकान की खरीद फरोख्त होने का आरोप लगाया गया है। वहीं नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी विनोद कुमार शर्मा का कहना है कि दुकानदार ने उनके पास किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा दुकान पर कब्जा करने की शिकायत दी है। कार्यकारी अधिकारी ने कहा कि नगर परिषद ने पीड़ित दुकानदार को पुलिस में मामला दर्ज करवाने की सलाह दी है। क्योंकि मामला धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि नगर परिषद खुद अपने स्तर पर भी मामले की जांच करेगी। अगर दुकान की सबलेटिंग पाई जाती है तो दोनों लोगों से दुकान वापस लेकर नगर परिषद किसी तीसरे व्यक्ति को नियमों के तहत दुकान आवंटित करेगी।