जिसे सबसे सुरक्षित मानकर अंग्रेजों ने समर कैपिटल बनाया, आज वही शिमला रहने के लिए सुरक्षित नहीं बचा है। शिमला में ब्रिटिशकाल में बने भवन अभी भी मजबूती से खड़े हैं, मगर अनियोजित तरीके से बन रहीं नई बहुमंजिला इमारतें धराशायी हो रही हैं। 1881 की पहली आधिकारिक ब्रिटिश जनगणना में शहर की जनसंख्या 13,605 दर्ज की गई थी और मौजूदा समय में शहर की आबादी लगभग 2,45,000 है। इससे साफ है कि शहर अपनी क्षमता से कहीं अधिक बोझ उठा रहा है।
शिमला में बसने को लेकर अंग्रेजों को यहां की आबोहवा ने आकर्षित किया, वहीं उन्हें अपनी सुरक्षा के लिहाज से भी सबसे उपयुक्त लगा। 1857 के विद्रोह से थके-डरे अंग्रेजों ने अंबाला से लेकर शिमला तक अलग-अलग जगहों और पहाड़ियों पर पांच छावनियां बसाकर किलेबंदी की। अंग्रेजों ने शिमला को बेहद व्यवस्थित तरीके से बसाया। भवनों को कम और आंगन को ज्यादा जगह दी। नालों-खड्डों का भी ख्याल रखा ताकि पानी का बहाव कहीं न रुके। आज स्थिति इससे उलट हो गई है। एक के साथ दूसरा मकान है। पानी के प्रवाह को गुजारने की बात छोड़ें, आवाजाही के लिए भी जगह नहीं बची।
संजौली के समिट्री में यदि कोई मौत हो जाए तो शवों को खिड़कियों से बाहर निकालना पड़ता है। मदद सेवा ट्रस्ट के संचालक विकास थापटा बताते हैं कि मिडल समिट्री में कोई बीमार हो जाए तो सड़क तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। अगस्त 2023 में भारी बारिश से समरहिल में शिव बावड़ी में मंदिर मलबे की चपेट में आ गया। हादसे में 21 लोगों की मौत हो गई। इसी दौरान बस स्टैंड के पास कृष्णानगर में नगर निगम के स्लाटर हाउस सहित 8 मकान भरभरा कर गिर गए। शहर में जगह जगह जमीन धंसने की घटनाएं सामने आईं। बावजूद शहर में निर्माण को नियंत्रित करने के लिए कोई गंभीर कदम नहीं उठाए गए। शिमला भूकंप के लिए संवेदनशील सिस्मिक जोन चार में आता है, जिसके चलते तेज झटके से यहां भारी नुकसान की आशंका है।
उच्च संवेदनशील श्रेणी में हैं शहर के 65 फीसदी भवन
यूएनडीपी (यूनाइटेड नेशनस डेवलपमेंट प्रोग्राम) के तहत नगर निगम भी खतरे, संवेदनशीलता एवं जोखिम को लेकर शहर का आकलन (एचवीआरए) करवा चुका है। रिपोर्ट के अनुसार शहर के करीब 65 प्रतिशत भवन उच्च संवेदनशील श्रेणी में हैं। भूस्खलन के खतरे को लेकर 51 प्रतिशत क्षेत्र मध्यम और 33 प्रतिशत उच्च जोखिम श्रेणी में हैं।
शिमला की तरक्की का मॉडल सही नहीं
शिमला की तरक्की का मॉडल मेरे हिसाब से सही नहीं है। अवैज्ञानिक विकास से नुकसान हो रहा है। शिमला सिस्मिक जोन 4 के हाई रिस्क एरिया में है। हेरिटेज जोन का स्वरूप बना रहे तो बेहतर होगा। देश-विदेश से लोग शिमला को देखने ही आते हैं। शिमला पैदल चलने वालों का शहर था, और भविष्य में भी यह स्वरूप बना रहना चाहिए। शहर की प्रतिबंधित सड़कों पर वाहनों की भीड़ इतनी बढ़ गई है कि पैदल चलना सुरक्षित नहीं रहा। - श्रीनिवास जोशी, पूर्व आईएएस अधिकारी (अंग्रेजों के जमाने में 1936 में शिमला में जन्मे और शिमला में ही शुरूआती पढ़ाई की)
राजधानी शिमला सहित प्रदेश के शहरी क्षेत्रों की सेटेलाइट आधारित जीआईएस मैपिंग की जाएगी। इसके लिए स्पेस टेक्नालॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा। क्षेत्र आधारित प्लान तैयार करने की भी योजना है। नियम बनाने के साथ उन्हें लागू करना महत्वपूर्ण है। इसमें आम लोगों के सहयोग की भी जरूरत है। - राजेश धर्माणी, नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री
अवैध भवनों को नियमित करने के लिए 5 बार लाई जा चुकी है रिटेंशन पालिसी
- 2009 - प्लानिंग एरिया और स्पेशल एरिया के अनाधिकृत भवनों के नियमितिकरण के लिए
- 2016 - शिमला के करीब 15,000 अनाधिकृत भवनों को 'जहां हैं जैसे हैं' के आधार पर नियमित करने के लिए
- 2019 - टीसीपी विभाग ने अधिसूचना जारी कर ऐसे भवनों को नियमित करने का प्रावधान किया जिनके नक्शे स्वीकृत नहीं थे
- 2023 - टीसीपी रूल्स 2023 के नौवें संशोधन की अधिसूचना के तहत निवास योग्य एटीक फ्लोर को नियमित करने की अनुमति
- 2025 - नगर निगम शिमला ने प्रस्ताव पास कर एक नई रिटेंशन नीति अथवा वन टाइम सेटलमेंट का प्रस्ताव पारित किया।
कनलोग में कब्रें खोद कर बना दिए 14 अवैध ढांचे
उच्च न्यायालय के अधिवक्ता और पर्यावरण कार्यकर्ता देवेन खन्ना का कहना है कि 200 साल पुरानी कनलोग समिट्री में कब्रें उखाड़ कर टिन के 14 अवैध ढांचे खड़े कर दिए गए। अवैध अतिक्रमण रोकने के लिए जब प्रशासन विफल हो गया तो उच्च न्यायालय को अतिक्रमण हटाने के निर्देश देने पड़े। शहर का यह क्षेत्र हेरिटेज जोन में आता है और यहा निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है।
शिमला अंग्रेजों ने पहले बनाया था तो एक या दो मंजिल के ही मकान होते थे। ज्यादातर बहुमंजिला इमारतें बाद में बनी हैं। अनधिकृत तरीके से बनाए मकानों को अलग-अलग सरकारों ने कई बार रिटेंशन पॉलिसी लाकर नियमित किया है। नालों के लिए कोई जगह नहीं छोड़ी गई है। पानी हर कहीं से बहता है। शिमला वैसे ही भूकंप के लिहाज बहुत संवेदनशील है। यहां भवनों के निर्माण के लिए सख्त नीति बनाने की ही नहीं, उसे लागू करने की भी जरूरत है। शिमला शहर में भीड़ को कम करने के लिए जाठिया देवी में सैटेलाइट टाउन को जल्द बसा देना चाहिए। - इंजीनियर आरएस जस्टा, शिमला के वयोवृद्ध निवासी