हिमाचल सरकार बाबा रामदेव को सोलन के साधुपुल और मशहूर अधिवक्ता प्रशांत भूषण को पालमपुर के नगरी में दी गई जमीन मामले में कानूनी सलाह लेगी। राजस्व मंत्री ठाकुर कौल सिंह ने बताया कि सोलन और कांगड़ा जिलों से इन दोनों भू-सौदों से संबंधित सारा राजस्व रिकार्ड मंगवाया गया था। कुछ आ गया है, कुछ आना अभी बाकी है। इसके बाद दोनों मामलों की फाइल विधि विभाग को भेजी जाएगी। कानूनी राय आने के बाद ही मंत्रिमंडल के सामने ये केस फैसला लेने के लिए रखा जाएगा।
इन दोनों सौदों में एक मुख्य भिन्नता यह है कि बाबा रामदेव को सरकार ने सरकारी जमीन लीज पर दी है और रजिस्ट्री उनके सहयोगी आचार्य बालकृष्ण के नाम है। राजस्व मंत्री के अनुसार उनकी नागरिकता को लेकर प्रश्न हैं और यदि वह नेपाली मूल के हैं तो उनके नाम रजिस्ट्री नहीं हो सकती।
दूसरा यह जमीन पटियाला के महाराजा ने किसी खास मकसद के लिए हिमाचल सरकार को दी थी। जबकि दूसरे केस में प्रशांत भूषण ने एक एजूकेशनल सोसाइटी के नाम पालमपुर के पास निजी जमीन खरीदी है। लेकिन इसके लिए राज्य सरकार ने भू-सुधार कानून की धारा 118 के तहत छूट दी हुई है।
रिकार्ड यह भी बताता है कि प्रशांत भूषण ने इसके लिए पूर्व कांग्रेस सरकार के समय ही आवेदन किया था, जिसे पूर्व सरकार ने ही प्रोसेस करवाया था। हालांकि मंजूरी भाजपा सरकार के समय दी गई। राज्य सरकार के पास प्रसिद्ध या ख्यातिप्राप्त व्यक्तियों को इस धारा के तहत छूट देने की शक्तियां हैं।
इधर राजस्व विभाग के सूत्र कहते हैं कि इन दोनों मामलों में विधि सलाह इसलिए ली जा रही है, ताकि सौदे रद करने से पहले सारी कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाए। यह भी संभव है कि फैसले लेने से पहले दोनों पक्षों को नोटिस जारी हो, ताकि उन्हें अपनी बात कहने का मौका दिया जाए।