2024-25 में लिया था चंडीगढ़ की तर्ज पर शराब बेचने का फैसला
राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ की तर्ज पर शराब की बिक्री करने का फैसला लिया था। बदलाव के तहत शराब की बोतलों पर एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) की जगह एमएसपी (न्यूनतम विक्रय मूल्य) लिखा गया। शराब कारोबारी को बिक्री के लिए उच्चतम कोई भी दाम नहीं दिया गया। यह उसे स्वयं तय करने को कहा गया कि कितना लाभांश रखते हुए शराब बेचनी है। पड़ोसी राज्यों से मुकाबले और अवैध शराब की निगरानी को सरकार ने आबकारी नीति में बदलाव किया था। पड़ोसी राज्यों में हिमाचल के मुकाबले शराब की खपत अधिक होती है ऐसे में वहां एमएसपी के माध्यम से शराब बेचने का फाॅर्मूला सफल रहा है। हिमाचल में बीते वर्ष अधिक बेस प्राइज पर शराब ठेके बिके थे। बीते वित्त वर्ष में कर एवं आबकारी विभाग को करीब 2600 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है। इस वर्ष राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य 2800 करोड़ रुपये रखा गया है।