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हिमाचल: पहली बागवानी मोनो रेल सुविधा शुरू, दुर्गम बगीचों तक खाद पहुंचाने और फलों की ढुलाई होगी आसान

Thu, 22 Oct 2026 07:54 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, डैहर (मंडी)।

सार

प्रदेश की पहली बागवानी मोनोरेल परियोजना शुरू हो गई है। अब दुर्गम बगीचों तक खाद पहुंचाने और फलों की ढुलाई आसान होगी। राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने गुरुवार को सुंदरनगर विकास खंड के पलोहटा क्लस्टर में 25 लाख रुपये की लागत से स्थापित मोनोरेल का उद्घाटन किया।
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बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने किया बागवानी मोनो रेल परियोजना का शुभारंभ। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश की पहली बागवानी मोनोरेल परियोजना शुरू हो गई है। अब दुर्गम बगीचों तक खाद पहुंचाने और फलों की ढुलाई आसान होगी। राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने गुरुवार को सुंदरनगर विकास खंड के पलोहटा क्लस्टर में 25 लाख रुपये की लागत से स्थापित मोनोरेल का उद्घाटन किया। यह मोनोरेल एक बार में पांच क्विंटल तक सामान ढो सकती है। एक किलोमीटर की दूरी तय करने में इसे करीब 20 मिनट लगते हैं। पेट्रोल से चलने वाली इस प्रणाली का माइलेज 4.5 किलोमीटर प्रति लीटर बताया गया है। फिलहाल एक किलोमीटर लंबी लाइन पर इसका संचालन किया जा रहा है। इसकी उपयोगिता बढ़ाने के लिए लाइन को दो किलोमीटर और विस्तारित करने तथा सुचारू संचालन के लिए दो अतिरिक्त इंजन उपलब्ध करवाने की मांग की गई है। 

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यह व्यवस्था फिलहाल एक पायलट परियोजना 
इस मौके पर बागवानी मंत्री ने कहा कि विदेशों की तर्ज पर शुरू की गई यह व्यवस्था फिलहाल एक पायलट परियोजना है। इसके परिणामों का आकलन करने के बाद सफल रहने पर इसे प्रदेश के अन्य पहाड़ी और दुर्गम बागवानी क्षेत्रों में भी लागू करने पर विचार किया जाएगा। पिछली बार पलोहटा क्लस्टर के दौरे के दौरान बागवानी कार्यों को आसान बनाने के लिए मोनोरेल स्थापित करने का विचार आया था, जो अब साकार हो गया है। मंत्री ने बताया कि प्रदेश के निचले क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए 1,100 करोड़ रुपये की हिमाचल प्रदेश शिवा परियोजना चलाई जा रही है। इसके तहत सात जिलों में 6,000 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया है। मंडी जिले में 1,000 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण का लक्ष्य फरवरी तक पूरा करने की योजना है।

पलोहटा क्लस्टर से जुड़े हैं 85 किसान
पलोहटा में 28.44 हेक्टेयर क्षेत्र में जापानी फल पर्सिमन की व्यावसायिक खेती की जाएगी। इस क्लस्टर से 85 किसान जुड़े हैं, जिनमें 73 पुरुष और 12 महिला किसान शामिल हैं। क्लस्टर में आधारभूत सुविधाओं पर 1.65 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इनमें ड्रिप सिंचाई प्रणाली पर 85.94 लाख रुपये, सौर ऊर्जा आधारित बाड़बंदी पर 46.55 लाख रुपये, भूमि विकास पर 32 लाख रुपये, पौधों पर 20.59 लाख रुपये और मल्च शीट पर 14.46 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। इसके अलावा मनरेगा के कार्यों पर 5.32 लाख रुपये और नीम खली पर 1.03 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।
 

कंगना बताए, मंडी संसदीय क्षेत्र के विकास के लिए क्या किया : नेगी
राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने मंडी संसदीय क्षेत्र की सांसद कंगना रणौत पर जुबानी हमला बोला है। नेगी ने तंज कसते हुए कहा कि मंडी की जनता ने सांसद को उनकी शक्ल देखकर वोट दिए हैं, अक्ल देखकर नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसद बनने के बाद कंगना रणौत ने मंडी संसदीय क्षेत्र के विकास के लिए कुछ नहीं किया है। ऐसे में उन्हें प्रदेश सरकार पर आरोप लगाने के बजाय अपने कार्यकाल में किए गए विकास कार्यों का हिसाब जनता के सामने रखना चाहिए। मंत्री वीरवार को गोहर उपमंडल के बाढू में जनसमूह को संबोधित कर रहे थे।
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नेगी ने कहा कि सांसद का दायित्व केवल प्रदेश सरकार की आलोचना करना नहीं, बल्कि अपने संसदीय क्षेत्र की समस्याओं को केंद्र सरकार के समक्ष उठाना भी है। प्रदेश के हितों की पैरवी करना और केंद्र से प्रदेश को उसका हक दिलाना सांसद की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि कंगना रणौत को केंद्र की मोदी सरकार से हिमाचल के लिए आर्थिक सहायता और विकास परियोजनाएं लाने की दिशा में प्रयास करने चाहिए। नेगी ने सवाल उठाया कि सांसद बताएं कि उन्होंने अब तक मंडी संसदीय क्षेत्र के विकास के लिए क्या किया है और केंद्र सरकार से प्रदेश को क्या दिलाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को लगातार निशाना बनाने से बेहतर होगा कि सांसद हिमाचल के अधिकारों और मंडी संसदीय क्षेत्र की जनता से जुड़े मुद्दों को केंद्र सरकार के समक्ष प्रमुखता से उठाएं।
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