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क्या हादसे का इंतजार? पहाड़ी धंसने की आशंका, असुरक्षित कमरे के साथ ही बच्चों की बरामदे में लग रहीं कक्षाएं

Sun, 03 Aug 2025 10:49 AM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन।

सार

प्राथमिक स्कूल कुमारहट्टी में 166 बच्चे खतरे के साये में पढ़ाई कर रहे हैं। स्कूल का एक कमरा गिरने के कगार पर है। दरारें आने से असुरक्षित घोषित कर दिया है। स्कूल में कक्षाएं लगाने के लिए पर्याप्त कमरे भी नहीं हैं। दो कक्षाओं के बच्चे बाहर बैठकर पढ़ाई करते हैं।
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असुरक्षित कमरा और बरामदे में बैठकर पढ़ाई करते बच्चे। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के कई ऐसे स्कूल हैं, जहां खतरे के साये में कल का भविष्य संवर रहा है। प्राथमिक स्कूल कुमारहट्टी में 166 बच्चे खतरे के साये में पढ़ाई कर रहे हैं। हालात ये हैं कि स्कूल के ठीक नीचे पहाड़ी के धंसने की आशंका बनी हुई है। 

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स्कूल का एक कमरा गिरने के कगार पर है। दरारें आने से असुरक्षित घोषित कर दिया है। हैरत की बात यह है कि इसे अभी तक गिराया नहीं गया है। इस कमरे के लिए 20 लाख रुपये की राशि विभाग ने जमा करवा दी है, लेकिन भवन का काम शुरू नहीं किया गया है। असुरक्षित कमरे के साथ करीब 50 मीटर की दूरी पर बरामदे में बच्चों की कक्षाएं लग रही हैं।

स्कूल में कक्षाएं लगाने के लिए पर्याप्त कमरे भी नहीं हैं। दो कक्षाओं के बच्चे बाहर बैठकर पढ़ाई करते हैं। बरामदे में बच्चे टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। इसी के साथ स्कूल में खेल मैदान भी नहीं है। असुरक्षित भवन के पास बच्चों को जाने से रोकने के लिए डेस्क को सहारा बनाया गया है। प्रबंधन का दावा है कि वह खेल के दौरान बच्चों का पूरा ध्यान रखते हैं। अधिक बच्चे और जगह कम होने से मीड-डे मिल खिलाने में दिक्कत आती है। 

2023 की बरसात में खतरे की जद में आया था भवन
स्कूल भवन वर्ष 2023 की बरसात में भी खतरे की जद में आ गया था। भवन के पिछली ओर पहाड़ी से भूस्खलन होने से दीवारें खराब हो गई थीं। अगली ओर भी स्कूल का मैदान धंस गया था। इससे करीब एक साल बच्चों की कक्षाएं नहीं लग रही थीं। अब फिर मरम्मत कर स्कूल में कक्षाएं लगनी शुरू हो गई हैं।
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मैदान नहीं, कैसे होंगी शारीरिक गतिविधियां : कुमारहट्टी स्कूल में मैदान नहीं है। इससे बच्चों की शारीरिक गतिविधियां नहीं हो रही हैं। स्कूल में इस प्रकार की गतिविधियों के न होने से सर्वांगीण विकास भी नहीं हो पा रहा है। अध्यापक काफी प्रयास करते हैं कि बच्चों की शारीरिक गतिविधिया करवाई जा सकें। 
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