कहा जाता है कि पिता अपने अधूरे सपने बच्चों की आंखों में देखता है और उन्हें पूरा करने के लिए जिंदगी भर मेहनत करता है। जब ये सपने पूरे हो जाते हैं तो बच्चों से ज्यादा खुशी माता-पिता को होती है। कुछ ऐसी ही संघर्ष की कहानी आईजीएमसी शिमला में कार्यरत एक डॉक्टर के पिता की है।
शिमला निवासी मिरजू राम ने बताया कि वह करीब 40 साल में होटल में खाना बनाने का काम कर रहे हैं। इसकी कमाई से ही उन्होंने अपने चार बच्चों का पालन-पोषण और पढ़ाई करवाई है। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी था जब उनके पास सिर्फ बच्चों की फीस के पैसे ही हाे पाते थे। उनके लिए वर्दी खरीदने के लिए भी पैसे उधार लेने पड़ते थे। लेकिन अब सुकून है। उनका छोटा बेटा आईजीएम में डॉक्टर के रूप में सेवाएं दे रहा है। बाकी तीन भी अच्छी जगह पर कार्य कर रहे हैं।
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शिमला के टक्का बेंच के पास गोलगप्पे बेचने वाले रामपाल शर्मा ने बताया कि वह करीब 55 वर्ष से यहां स्टॉल लगा रहे हैं। सुबह पांच बजे उठकर तैयारी में जुट जाते हैं और स्टॉल पर रात को जबतक ग्राहक हों, तब तक काम करते हैं। उन्होंने बताया कि वह सिर्फ पांच घंटे सोते हैं और दो वक्त खाना खाते हैं। उन्होंने बताया कि उनके तीन बच्चे हैं और तीनों ने शिमला में ही पढ़ाई की है। उनकी बड़ी बेटी चंडीगढ़ में एक कंपनी में अच्छे पद पर काम करती हैं और छोटी बेटी एनजीओ में काम करती है।