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हाईकोर्ट की दोटूक: अदालती आदेश पर बहानेबाजी नहीं चलेगी, सरकार को तीन हफ्ते की मोहलत

Tue, 27 Oct 2026 07:42 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

 प्रदेश हाईकोर्ट ने अदालती आदेशों को लागू न करने और उनके क्रियान्वयन में टालमटोल करने पर राज्य सरकार के रवैये के प्रति सख्त नाराजगी जताई है। 
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अदालती आदेशों को लागू न करने और उनके क्रियान्वयन में टालमटोल करने पर राज्य सरकार के रवैये के प्रति सख्त नाराजगी जताई है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने सरकार को आदेश का पूरी तरह पालन करने के लिए तीन हफ्ते का आखिरी मौका दिया है। साथ ही याचिकाकर्ता को 10 हजार की हर्जाना राशि देने का आदेश दिया है। अदालत ने यह आदेश याचिकाकर्ता जोगिंद्र कुमार की ओर से दायर निष्पादन याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह बिना किसी बहानेबाजी के मूल फैसले के अनुरूप तुरंत आवश्यक कदम उठाए। अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी।

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याचिकाकर्ता जोगिंद्र कुमार मूल रूप से ओम प्रकाश बनाम हिमाचल राज्य मामले में शामिल था। इस मामले में 7 जुलाई 2023 को हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि याचिकाकर्ताओं को 1 अक्तूबर 2012 से मुख्य शिक्षक के पद पर प्रोमोशनल इंक्रीमेंट (पदोन्नति वेतन वृद्धि) जारी की जाए। अदालत ने साफ कहा था कि यह प्रक्रिया 6 सप्ताह के भीतर पूरी हो जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने सितंबर 2025 में ही सरकार को अनुपालन हलफनामा या जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। एक साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक हलफनामा दाखिल नहीं किया गया।
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सुनवाई के दौरान राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता ने प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक (कांगड़ा) का एक आदेश पेश किया, जिसमें कहा गया कि विभाग ने याचिकाकर्ता के मामले की समीक्षा किसी अन्य मामले (सूर्या प्रभा बनाम हिमाचल राज्य) के संदर्भ में की है। इस पर अदालत ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि जब अदालत ने याचिकाकर्ता के पक्ष में सीधा और स्पष्ट फैसला सुनाया था, तो विभाग के पास कोर्ट के फैसले के ऊपर बैठकर उसकी दोबारा समीक्षा करने या उसे किसी अन्य मामले से जोड़ने का कोई अधिकार नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विभाग का काम सिर्फ फैसले का पालन करना है, उस पर पुनर्विचार करना नहीं।
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