पांच महत्त्वपूर्ण चरणों में सड़क सुरक्षा ऑडिट होगा
इस नीति के अंतर्गत किसी भी सड़क परियोजना के पांच महत्त्वपूर्ण चरणों में सड़क सुरक्षा ऑडिट किया जाएगा। इनमें व्यवहार्यता अथवा प्रारंभिक डिजाइन चरण, विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) चरण, निर्माण चरण, सड़क को यातायात के लिए खोलने से पूर्व का चरण तथा पहले से निर्मित सड़कों का ऑडिट शामिल है। व्यवहार्यता चरण में ऑडिटर मार्ग चयन, सड़क की संरेखण (अलाइनमेंट), चौराहों, क्रॉस-सेक्शन तथा मौजूदा सड़क नेटवर्क से संपर्क का परीक्षण करेंगे। विस्तृत डिजाइन चरण में ज्यामितीय डिजाइन, सड़क संकेतक, सड़क चिह्नांकन, प्रकाश व्यवस्था, संवेदनशील सड़क उपयोगकर्ताओं (जैसे पैदल यात्री एवं साइकिल चालक) के लिए सुविधाएं तथा सड़क किनारे सुरक्षा प्रावधानों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी।
ऑडिट सुझावों के अनुपालन की समीक्षा होगी
निर्माण चरण के दौरान ऑडिट में कार्यस्थल सुरक्षा, यातायात प्रबंधन योजना, श्रमिकों की सुरक्षा तथा पूर्व में दिए गए ऑडिट सुझावों के अनुपालन की समीक्षा की जाएगी। सड़क को यातायात के लिए खोलने से पूर्व दिन एवं रात्रि दोनों समय विस्तृत निरीक्षण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, पहले से निर्मित सड़कों का भी समय-समय पर ऑडिट किया जाएगा ताकि उभरते हुए जोखिमों और सुरक्षा संबंधी कमियों की पहचान कर उनका समय पर समाधान किया जा सके। नीति के अनुसार सड़क सुरक्षा ऑडिट केवल भारतीय सड़क कांग्रेस की ओर से प्रमाणित रोड सेफ्टी ऑडिटर अथवा ऐसे विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी करेंगे जिन्होंने 15 दिवसीय सड़क सुरक्षा ऑडिट प्रमाणन प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया हो तथा पर्वतीय सड़कों के निर्माण का कम से कम 10 वर्ष का अनुभव रखते हों। साथ ही यह भी अनिवार्य किया गया है कि ऑडिटर स्वतंत्र हों और जिस परियोजना का ऑडिट कर रहे हों, उसके निर्माण, क्रियान्वयन या संचालन से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध न हो।
समर्पित रोड सेफ्टी सेल स्थापित होगा
संस्थागत व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए लोक निर्माण विभाग मुख्यालय में एक समर्पित रोड सेफ्टी सेल स्थापित किया जाएगा। यह सेल सड़क सुरक्षा ऑडिट कार्यक्रम के क्रियान्वयन की निगरानी करेगा, प्रगति का आकलन करेगा, योग्य ऑडिटरों का पैनल तैयार करेगा, अनुपालन रिपोर्टों की समीक्षा करेगा तथा अभियंताओं और अन्य हितधारकों के लिए प्रशिक्षण एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेगा। नीति में यह भी प्रावधान किया गया है कि विभाग के अभियंता प्रमुख द्वारा प्रत्येक तिमाही में कार्यक्रम की समीक्षा की जाएगी, ताकि इसकी प्रभावशीलता सुनिश्चित की जा सके और आवश्यक सुधार किए जा सकें।
नीति में यह महत्वपूर्ण प्रावधान
नीति का एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि एक करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली प्रत्येक सड़क परियोजना में सड़क सुरक्षा ऑडिट के लिए परियोजना लागत का एक प्रतिशत अनिवार्य रूप से निर्धारित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, सड़क संकेतकों, सड़क चिह्नांकन, यातायात शांत करने के उपायों, कार्यस्थल प्रबंधन, पैदल यात्री सुविधाओं, साइकिल ट्रैक, पर्वतीय सड़कों, सुरक्षा अवरोधकों, चौराहों तथा ज्यामितीय डिज़ाइन संबंधी भारतीय सड़क कांग्रेस के विभिन्न मानकों एवं मैनुअलों का पालन करना भी अनिवार्य होगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि हिमाचल प्रदेश में निर्मित सड़कें सर्वोच्च सुरक्षा मानकों के अनुरूप हों और सभी सड़क उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित यात्रा उपलब्ध कराएं।
सड़क नेटवर्क को अधिक सुरक्षित, सक्षम और सुदृढ़ बनाने के लिए प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश के सड़क नेटवर्क को अधिक सुरक्षित, अधिक सक्षम और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रत्येक सड़क परियोजना में मानव जीवन और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सड़क सुरक्षा ऑडिट नीति विकास के प्रत्येक चरण में संभावित जोखिमों की पहचान कर समय रहते आवश्यक सुधारात्मक उपाय सुनिश्चित करेगी। सुरक्षित सड़कें न केवल दुर्घटनाओं को रोकती हैं और लोगों का जीवन बचाती हैं, बल्कि राज्य में आर्थिक विकास तथा बेहतर संपर्क व्यवस्था को भी बढ़ावा देती हैं।
सड़क दुर्घटनाओं में 6.48 प्रतिशत की कमी
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्वतंत्र सड़क सुरक्षा ऑडिट को संस्थागत रूप देकर तथा सभी स्तरों पर जवाबदेही सुनिश्चित करके सड़क सुरक्षा के प्रति सक्रिय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपना रही है। उन्होंने दोहराया कि मानव जीवन की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और प्रदेश में सुरक्षित एवं टिकाऊ सड़क अवसंरचना विकसित करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। वर्ष 2023 की तुलना में वर्ष 2024 में हिमाचल प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में 6.48 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी। वर्ष 2023 में जहां कुल 2,253 सड़क दुर्घटनाए दर्ज की गई थीं, वहीं वर्ष 2024 में यह संख्या घटकर 2,107 रह गई। इसी प्रकार, सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु संख्या में भी उल्लेखनीय कमी आई है। वर्ष 2023 में 892 लोगों की मृत्यु हुई थी, जबकि वर्ष 2024 में यह संख्या घटकर 806 रह गई। इसके अतिरिक्त, सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वालों की संख्या भी वर्ष 2023 के 3,449 से घटकर वर्ष 2024 में 3,290 हो गई।