प्रदेश सरकार की ओर से बीते दिनों हिमाचल में बाहरी राज्यों के वाहनों का प्रवेश शुल्क बढ़ाने का फैसला लिया गया है। एक अप्रैल 2026 से बढ़ी हुई दरें लागू होनी हैं। पंजाब सरकार की ओर से हिमाचल के इस फैसले का विरोध किया जा रहा है। बीते दिनों पंजाब की विधानसभा में भी यह मामला उठा था। पंजाब सरकार ने हिमाचल के वाहनों पर भी शुल्क लगाने की पेशकश की थी। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ा। इसी कड़ी में अब मुख्यमंत्री सुक्खू ने पंजाब के मुख्यमंत्री से बात कर मामला सुलझाने की पहल की है।
मुख्यमंत्री ने कर एवं कराधान विभाग से एंट्री टैक्स को लेकर दोबारा से रिपोर्ट देने को कहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि दो राज्यों के बीच खड़े हुए इस विवाद को समाप्त करने के लिए हिमाचल एंट्री टैक्स में कुछ कमी कर सकता है। उधर, इस बाबत लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि राज्य का राजस्व बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार के पास टैक्स लगाने का अधिकार है। हिमाचल सरकार पंजाब सरकार के साथ किसी तरह का कोई विवाद नहीं चाहता है। हिमाचल प्रदेश से भी बहुत गाड़ियां पंजाब जाती हैं। मुख्यमंत्री की ओर से बातचीत के माध्यम से बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट जाएं, चाहे भगवान के पास उनकी मर्जी : अनिरुद्ध
पंचायतीराज और ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि कैबिनेट बैठक में इस मामले पर विस्तार से चर्चा हुई है। प्रदेश का राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है। टैक्स वसूली के लिए फास्टैग भी इंट्रोड्यूस किया गया है। एक्सेल वेट के आधार पर टैक्स लिया जाना है। अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि कुछ गाड़ियों में 130 रुपये से बढ़ाकर एंटी टैक्स 170 हुआ है, तो केवल 40 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा कुछ वाहनों का टैक्स काम भी हुआ है, लेकिन उसे बताया नहीं जा रहा। पंजाब सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने के बयान पर अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि उनकी मर्जी हैं, वह सुप्रीम कोर्ट जाएं, चाहे भगवान के पास।