उन्होंने कहा कि यह राज्य का अपनी तरह का पहला विशेष केंद्र है, जो महिलाओं का केवल उपचार ही नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन की ओर लौटने का अवसर प्रदान करेगा। इस केंद्र में पीड़ित महिलाओं को सुरक्षित आवास, चिकित्सकीय उपचार, मनोवैज्ञानिक परामर्श, पुनर्वास एवं पुर्नस्थापना और परिवार आधारित सहयोग प्रणाली उपलब्ध होगी। इसी तरह का सरकारी क्षेत्र में दूसरा नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र टांडा में खोला जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे के शिकार युवा या महिलाएं अपराधी नहीं हैं लेकिन नशा बेचने वाले तस्कर समाज के दुश्मन हैं। सरकार ऐसे अपराधियों के प्रति किसी प्रकार की नरमी नहीं बरतेगी। सरकार की नीति पीड़ितों के प्रति संवेदना और नशे के तस्करों से कठोरता से निपटना है।
जब कोई बेटी या महिला नशे की गिरफ्त में आती है तो केवल एक व्यक्ति प्रभावित नहीं होता, बल्कि पूरा परिवार उसके बच्चे और आने वाली पीढ़ियां भी प्रभावित होती हैं। चिट्टा तस्करों के विरुद्ध राज्य में कड़ी कार्रवाई की जा रही है। सरकार ने शिमला से पिछले वर्ष 15 नंवबर को ‘एंटी-चिट्टा जन आंदोलन’ की शुरुआत की थी जो आज यह एक व्यापक सामाजिक अभियान बन चुका है। यह केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं है बल्कि युवाओं, पंचायत प्रतिनिधियों, शिक्षकों, स्वयंसेवी संस्थाओं और आम नागरिकों का जन आंदोलन बन चुका है।
उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे चिट्टे के खिलाफ लड़ाई में बढ़-चढ़कर भाग लें। सरकार नशा तस्करों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई आरंभ कर पीआईटी-एनडीपीएस जैसे कठोर प्रावधानों में कार्रवाई कर रही है। इस अवसर पर महापौर सुरेंद्र चौहान, हिमाचल प्रदेश नशा निवारण बोर्ड के सह-संयोजक संजय भारद्वाज, पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी, ईसोमसा के निदेशक सुमित किमटा, उपायुक्त अनुपम कश्यप और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह मौजूद रहे।
प्रदेश खेलो इंडिया की मेजबानी के लिए दावा करेगा। मुख्यमंत्री ने इस बाबत खेल विभाग को निर्देश जारी कर दिए हैं। संजौली में बहुउद्देशीय खेल स्टेडियम का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए तैयार है। हमारी कोशिश है कि वर्ष 2026-27 और 2028 में खेलो इंडिया का आयोजन हिमाचल में हो। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय ग्रीष्मोत्सव शिमला के तहत प्रदेश की पहली ‘चिट्टा जागरूकता वॉलीबॉल प्रतियोगिता’ का भी शुभारंभ किया। उन्होंने प्रतियोगिता की ट्रॉफी का अनावरण किया तथा विजेता टीम को एक लाख रुपये की नकद पुरस्कार राशि देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में ऐसे आयोजनों के लिए पर्याप्त आधारभूत ढांचा और सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम तैयार कर रही है। उन्होंने कुटासनी स्टेडियम का निर्माण कार्य पूरा करने के लिए दस करोड़ रुपये देने की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार खेल नीति पर काम कर रही है। इसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों को बेहतर पुरस्कार देने की व्यवस्था की जाएगी। संजौली में 3.18 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित स्टेडियम में खेल प्रतियोगिताओं के लिए खुला मैदान, ओपन हॉल, रसोईघर एवं हॉल तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई हैं।
उन्होंने कहा कि दो सौ किलोमीटर दूर कोई भी खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा लेता है तो उसे 500 रुपये प्रतिदिन डाइट मनी और हवाई यात्रा की सुविधा मिलेगी। दो सौ किलोमीटर से कम दूरी पर जाने पर खिलाड़ियों को 400 रुपये डाइट मनी और एसी बस की सुविधा दी जा रही है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रदेशभर से आई टीमों को किट देकर भी सम्मानित किया। इस अवसर पर शिमला शहरी विधायक हरीश जानरथा, नगर निगम शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान, उपायुक्त अनुपम कश्यप, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह, युवा सेवाएं एवं खेल विभाग के निदेशक शिवम प्रताप सिंह तथा अन्य गण्यमान्य लोग उपस्थित रहे।