रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 9.6 प्रतिशत बढ़कर राष्ट्रीय औसत से आगे निकल गई है। नवजात मृत्यु दर 1000 शिशुओं के पीछे प्रदेश में 20.5 है और देश में औसत 24.9 है। हालांकि, रिपोर्ट में चिंता जताई गई है कि पांच वर्ष से कम उम्र के 30 प्रतिशत से अधिक बच्चे अविकसित या कम वजन के हैं। सतत विकास मूल्य इंडेक्स में भी हिमाचल 77 के सूचकांक के साथ देश में पांचवें स्थान पर रहा है, जबकि राष्ट्रीय औसत 71 है।
अर्थव्यवस्था में कम हो रही कृषि की हिस्सेदारी
रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल की अर्थव्यवस्था कृषि से दूर जा रही है। यह क्षेत्र राज्य के कुल कार्यबल के 54 प्रतिशत को रोजगार देता है। लेकिन यह सकल मूल्य वृद्धि (जीवीए) में केवल 14 प्रतिशत योगदान देती है, जिससे राज्य की आय में इसका हिस्सा उद्योग और सेवाओं से कम हो जाता है। उद्योग कुल कार्यबल का 22 प्रतिशत एवं सेवाएं 24 प्रतिशत को रोजगार देते हैं, लेकिन राज्य के जीवीए में इनका हिस्सा बहुत अधिक है। यह क्रमवार 40 और 45 प्रतिशत हैं। विनिर्माण क्षेत्र, विशेष रूप से फार्मास्यूटिकल्स, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) का राज्य के जीवीए में लगभग 27 प्रतिशत है। पर्यटन का योगदान 7.8 प्रतिशत है।
जलवायु परिवर्तन विकास को बाधित करने का पैदा कर रहा खतरा
रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन हिमाचल के विकास को बाधित करने का खतरा पैदा कर रहा है। 1901 से औसत वार्षिक तापमान में 1.5 सेल्सियस की वृद्धि हुई है और अनुमान है कि सदी के मध्य तक तापमान 2-3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाएगा। 1 जून से 6 सितंबर 2025 के बीच की अवधि में 46 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई है, जिसके कारण 366 लोगों की जान गई है और 4000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। ग्लेशियर प्रतिवर्ष 50 मीटर से अधिक की दर से पीछे हट रहे हैं और नई हिमनद झीलों के निर्माण से हिमनद झील विस्फोट का खतरा बढ़ गया है।
इंटरनेट का उपयोग करने में भी हिमाचल आगे
इंटरनेट का उपयोग करने के मामले में भी हिमाचल प्रदेश देश के औसत से आगे है। यहां पर 67.9 फीसदी पुरुष और 49.7 फीसदी महिलाएं इंटरनेट का इस्तेमाल करती हैं, जबकि देश में यह औसत क्रमवार 57.1 व 33.3 है।