पंगलियुर गांव में गत रात्रि भूस्खलन में बहे दंपती पदम सिंह व देबकु देवी का फाइल फोटो।
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गोहर उपमंडल की स्यांज पंचायत का छोटा सा गांव पंगलियुर कभी इतना खामोश नहीं था। सोमवार रात तक यहां जीवन सधी हुई लय में आगे बढ़ रहा था। रात दो बजे ज्यूणी खड्ड ने रौद्र रूप दिखाया और सब कुछ हमेशा के लिए बदल दिया। बच्चों की किताबें, कपड़े, चप्पलें और आंगन की मिट्टी सब गवाही दे रही हैं कि यहां कभी बस्ती थी।
स्यांज पंचायत के प्रधान मनोज शर्मा बताते हैं कि जैसे ही घटना की सूचना मिली, भागे भागे घटनास्थल पर पहुंचे। यहां बस सन्नाटा था, मलबा था और बहता पानी। दो परिवारों के नौ लोग ज्यूणी खड्ड के उफनते पानी में समा गए। कुछ को नींद से जागने तक का मौका नहीं मिला। मकान मिट्टी बन गए। दो परिवारों के लोग बिखर चुके थे। गांववालों की आंखों में आस थी और दिल में डर था।
रात का अंधेरा इंतजार को और भारी बना रहा था। प्रशासन तो आया मगर तब जब उजाले ने तबाही के मंजर को दिखाना शुरू कर दिया था। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें करीब 12 घंटे बाद पहुंचीं, तब तक पंगलियुर गांव में मलबे के ढेर के अलावा कुछ नहीं बचा था। स्यांज पंचायत प्रधान मनोज शर्मा ने आरोप लगाया है कि सोमवार रात घटना के समय प्रशासन को सूचित कर दिया गया था, मगर सर्च ऑपरेशन 12 घंटे बाद शुरू किया गया।
अब सिर्फ लिया जा रहा हालात का जायजा
घटना की सूचना मिलते ही शिमला से नाचन के विधायक विनोद कुमार भी स्यांज पहुंचे और हालात का जायजा लिया। राज्य सहकारी बैंक के निदेशक लाल सिंह कौशल ने प्रभावित परिवारों को ढाढ़स बंधाया। कांग्रेस नेता नरेश चौहान भी हालात जानने स्यांज पहुंचे। एसडीएम स्मृतिका नेगी, तहसीलदार कृष्ण कुमार और बीडीओ श्रवण कुमार भी घटनास्थल पर मौजूद रहे। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को 25-25 हजार रुपये की फौरी राहत दी।