मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अपने कैबिनेट मंत्रियों को सप्ताह में कम से कम 4 दिन राज्य सचिवालय में बैठने के निर्देश दिए हैं।
बुधवार को मंत्रिमंडल की बैठक में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सबसे पहले मंत्रियों को फरवरी में जारी लिखित निर्देशों की याद दिलाई और कहा कि उनके ध्यान में आया है कि कैबिनेट मंत्री सचिवालय में न बैठकर या तो टूअर पर या चुनाव क्षेत्र में होते हैं।
इससे यहां न तो जन समस्याएं सुनी जा रही हैं और न ही फाइलों का निपटारा समय पर हो रहा है। इसलिए मंत्री अब हफ्ते में कम से कम 4 दिन सचिवालय में अपने कार्यालय में उपस्थित रहें।
अन्य 3 दिन मंत्री टूअर कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि उनके शिमला में न होने पर शिमला आने वाले लोगों को सचिवालय में कोई मंत्री नहीं मिलता। यह चलन सही नहीं है।
इस ताजा निर्देशों का असर पहले दिन दिखा भी। वीरवार को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह हालांकि खुद जनजातीय क्षेत्रों के टूअर पर किलाड़ रवाना हो गए हैं, लेकिन सचिवालय में कई कैबिनेट मंत्री उपस्थित रहे।
इनमें आईपीएच एवं बागवानी मंत्री विद्या स्टोक्स, स्वास्थ्य मंत्री ठाकुर कौल सिंह, आबकारी एवं कराधान मंत्री प्रकाश चौधरी, उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री, शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा आदि शामिल थे।
फोन टैपिंग की धीमी जांच से सीएम नाराज
शिमला। फोन टैपिंग मामले में धीमी जांच से मुख्यमंत्री नाराज हैं। उन्होंने फील्ड दौरे पर रवाना होने से पहले उच्च प्रशासनिक अफसरों से इस बारे में रिपोर्ट ली और जांच को उम्मीद से बेहद धीमा बताया।
इसके बाद गृह विभाग ने विजिलेंस को पत्र भेजकर इस जांच को तेज करने के निर्देश दिए हैं। सरकार इसलिए भी नाराज है कि इस केस में महीनों पहले एफआईआर दर्ज होने के बाद आज तक किसी का नाम इसमें नहीं जोड़ा जा सका है। जांच एजेंसी से पूछा गया है कि आखिर जांच इतनी धीमी क्यों है?