चंबा में चुराह का खुंडी मराल क्षेत्र।संवाद
तीसा (चंबा)। चुराह विधानसभा क्षेत्र में ऐसे पर्यटन स्थल हैं, जहां अभी तक सरकार की नजर नहीं पड़ी है।
अगर इन क्षेत्रों को सड़क से जोड़ दिया जाए तो यहां पर्यटकों की संख्या में इजाफा होने के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। बेरोजगारों को भी रोजगार के अवसर मिलेंगे। चुराह की पंचायत देहरा स्थित चांजू मंदिर से खुंडी मराल तक 15 किलोमीटर सड़क बनने से इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
खुंडी मराल में चारों तरफ खुला मैदान और एक डल झील हैं। इसकी सुंदरता और प्राकृतिक नजारों का लुत्फ लेने के लिए बाहरी राज्यों से पर्यटक पहुंचेंगे। यह डल झील करीब दो किलोमीटर तक फैली है। खुंडी मराल तक सफर के दौरान रास्ते में वाटरफाल और ग्लेशियर भी आएंगे। ग्लेशियर में अगस्त तक बर्फ रहती है। इसकी दूसरी ओर लाहौल-स्पीति का सीमांत क्षेत्र लगता है। प्रबुद्धजनों अंबिया राम, राकेश कुमार, प्रकाश चंद, अशोक कुमार, दलीप कुमार, संजीव कुमार, लोकेंद्र सिंह, पुष्पराज, प्रीतम चंद और अजीत कुमार ने मांग की है कि खुंडी मराल तक रास्ते को पक्का कर इस क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाए।
खुंडी मराल समुद्रतल से करीब 3750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह एक धार्मिक स्थल है। यहां हर वर्ष अगस्त में श्रद्धालु जातर का हिस्सा बनने के लिए चुराह के दतुई गांव से खुंडी मराल का 15 किलोमीटर पैदल सफल करते हैं। चांजू स्थित काली माता मंदिर तक बस सेवा उपलब्ध है, लेकिन इससे आगे श्रद्धालुओं को 15 किलोमीटर तक ऊबड़-खाबड़ रास्ते और नदी-नालों को पार कर पैदल सफर तय करना पड़ता है। खुंडी मराल झील को इसके अन्य नामों जैसे महाकाली झील और चौरासी का डल के नाम से भी जाना जाता है।