चंबा। पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) चंबा में मरीजों की हड्डियों की कमजोरी का पता लगाने वाले विटामिन डी टेस्ट नहीं हो पा रहे हैं। सरकारी प्रयोगशाला से लेकर अस्पताल में संचालित क्रस्ना लैब में भी मरीजों को इस टेस्ट की सुविधा नहीं मिल पा रही है। मरीजों को 1000 से 1500 रुपये खर्च कर निजी लैब में विटामिन डी के टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं।
रोजाना 25 से 30 मरीज इस टेस्ट को करवाने के लिए निजी लैबों की दौड़ लगा रहे हैं। जब भी कोई मरीज हड्डी के दर्द या मांसपेशियों में असहनीय दर्द को लेकर पहुंचता है तो उसकी हडि्डयों की मजबूती का पता लगाने के लिए विशेषज्ञ विमामिन डी टेस्ट करवाने का परामर्श देते हैं। जब मरीज टेस्ट करवाने के लिए सरकारी लैब में जाते हैं, तो उन्हें बैरंग लौटा दिया जाता है। सरकारी प्रयोगशाला में टेस्ट की एनालाइजर मशीन ही नहीं है।
कहने के लिए चंबा में सरकार ने मेडिकल कॉलेज खोल दिया है, लेकिन सुविधाएं अभी तक नागरिक अस्पतालों जैसी मिल रही हैं। प्रयोगशाला में होने वाले जरूरी टेस्ट नहीं किए जा रहे हैं। विशेषज्ञ मरीजों को ठीक करने के लिए जरूरी टेस्ट लिख देते हैं, लेकिन मरीजों को ये टेस्ट करवाने के लिए निजी लैबों में जाकर महंगे दाम चुकाने पड़ते हैं।
तीमारदारों में रविंद्र कुमार, केवल सिंह, हंसराज, जितेंद्र कुमार, सुरेंद्र ठाकुर और मनीष कुमार ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में मरीजों को टेस्ट से लेकर अन्य सभी सुविधाएं मिलनी चाहिए। मगर चंबा में मरीजों को यह सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि सरकारी लैब में मरीजों के सभी टेस्ट करने की व्यवस्था करवाई जाए।
उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि सरकारी लैब में विटामिन डी टेस्ट शुरू करने को लेकर जल्द ही उचित कदम उठाए जाएंगे।