चंबा। सरकारी मेडिकल कॉलेज चंबा में सेवाएं दे रहे 100 से अधिक प्रशिक्षु चिकित्सकों को अब तक हॉस्टल सुविधा नहीं मिल पाई है। इसके चलते उन्हें निजी किराये के कमरों में रहकर देररात तक ड्यूटी के लिए आवाजाही करनी पड़ रही है, जबकि अधिकांश मेडिकल कॉलेजों में प्रशिक्षुओं के लिए हॉस्टल की व्यवस्था होती है।
सरोल में तैयार हुए मेडिकल कॉलेज के नए भवन में प्रशिक्षुओं के हॉस्टल के निर्माण का प्रावधान दूसरे चरण में किया गया है, लेकिन अब तक इसके लिए सरकार की ओर से बजट मंजूर नहीं किया है। जब तक निर्माण शुरू नहीं होता, प्रशिक्षुओं को निजी आवासों में ही रहने की विवशता बनी रहेगी। हाल ही में देर रात ड्यूटी के बाद लौटते वक्त दो प्रशिक्षु एक सड़क हादसे का शिकार हो गए, जिसमें दोनों की मौत हो गई। यदि हॉस्टल परिसर में होता तो ऐसी घटनाओं की संभावना कम हो सकती थी।
हॉस्टल न होने की स्थिति में प्रशिक्षुओं को न सिर्फ रोज़ाना यात्रा करनी पड़ती है, बल्कि देर रात और तंग गलियों से गुजरना भी जोखिमभरा साबित हो सकता है। ऐसे में सरकार को न केवल प्रशिक्षुओं की सुविधा बल्कि सुरक्षा को भी ध्यान में रखते हुए शीघ्र बजट जारी करना चाहिए।
प्रशिक्षुओं के हॉस्टल निर्माण को दूसरे चरण में शामिल किया है। जैसे ही बजट जारी होता है, निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। फिलहाल प्रशिक्षु निजी कमरों में रहकर सेवाएं दे रहे हैं। डॉ. पंकज गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, चंबा