मेडिकल कॉलेज चंबा में मरीजों पर अव्यवस्था पड़ने लगी भारी
दांत निकलवाने के लिए भी निजी क्लीनिकों का कर रहे रुख
संवाद न्यूज एजेंस
चंबा। मेडिकल कॉलेज में चल रही अव्यवस्था जिले की पौने छह लाख की आबादी पर भारी पड़ रही है। आलम यह है कि मेडिकल कॉलेज में एम-सेट (उल्टी) और पैनटॉप (एसिडिटी) जैसे सामान्य इंजेक्शन तक मरीजों को बाजार से खरीदने पड़ रहे हैं। इससे मरीजों की जेबों पर भी खूब कैंची चल रही है। ये दवाएं गैस्ट्रोएसोफेजियल रिफ्लक्स रोग (जीईआरडी), पेप्टिक अल्सर और पेट में एसिड से संबंधित समस्याओं के इलाज के लिए आवश्यक हैं। इतना ही नहीं, मेडिकल कॉलेज चंबा में दांत निकलवाने के लिए आवश्यक मशीन तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में दांत दर्द से पीड़ित मरीजों और दांत निकलवाने वाले लोगों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। मेडिकल कालेज चंबा में आवश्यक इंजेक्शन, दांत निकालने की मशीन न होना लोगों की परेशानियां बढ़ा रहा है। अब लोग मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की लचर व्यवस्था को कोसते नजर आ रहे हैं।
जिले के सबसे बड़े अस्पताल पर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए विधानसभा क्षेत्र चुराह, भरमौर-पांगी, भटियात, डलहौजी और चंबा की पौने छह लाख की आबादी निर्भर है। बावजूद इसके पहले से ही चिकित्सीय और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी से जूझ रहे मेडिकल कॉलेज में आवश्यक इंजेक्शनों का अभाव मरीजों की सेहत से सीधा खिलवाड़ है। स्थानीय लोगों डॉ. डीके सोनी, संदीप शर्मा, शादी लाल शर्मा, किशोर शर्मा, लोकिंद्र शर्मा, लेखराज धीमान, धर्मवीर सिंह, जगदीश चंद, केएल शाह, प्रमोद कुमार, देवेंद्र कुमार, बजीर सिंह आदि ने बताया कि अस्पताल में उल्टी, गैस के इंजेक्शन तक उपलब्ध न होना स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था को दर्शाता है। मेडिकल कॉलेज में व्यवस्थाओं में सुधार होना अत्यंत आवश्यक है।
मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रदीप सिंह ने बताया कि दवाइयों की कमी को लेकर उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया गया है। जल्द इंजेक्शन समेत अन्य दवाइयों की खेेप मेडिकल कॉलेज चंबा में पहुंच जाएगी।
सदर विधायक नीरज नैयर ने बताया कि मामला ध्यान में लाया गया है। इसके बारे में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य से बात कर जानकारी हासिल की जाएगी।