बिना एफसीए बिछाई जा रही 33 केवी लाइन को लेकर अधिकारियों से होगी चर्चा
वन विभाग ने लाहौल से पांगी के लिए बिछाई जा रही लाइन का कार्य करवाया है बंद
बिना एफसीए बिजली बोर्ड ने घने जंगलों के बीच 33 केवी लाइन को बिछाने की कोशिश
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। पांगी घाटी में बिना एफसीए बिछाई जा रही 33 केवी लाइन का मुद्दा गर्माता नजर आ रहा है। जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी ने बिजली बोर्ड, वन विभाग और आवासीय आयुक्त पांगी को इस मामले में शिमला बुलाया है।
बुधवार को मंत्री प्रशासन और दोनों विभागों के अधिकारियों को आमने-सामने बैठाकर चर्चा करेंगे। 48 करोड़ की लागत से लाहौल से पांगी के लिए बिछाई जा रही 33 केवी लाइन को पांगी की सीमा पर वन विभाग ने रोक दिया है। विभाग ने तर्क दिया है कि बिना एफसीए की अनुमति से यह कार्य किया जा रहा है। इससे हरे भरे देवदार के जंगलों को भारी नुकसान होगा। साथ ही मानव जीवन को भी इससे खतरा हो सकता है जबकि इस कार्य को शुरू करने से पूर्व एफसीए अनुमति लेना अनिवार्य था। बिजली बोर्ड तर्क दे रहा है कि पुरानी 11केवी लाइन को अपडेट किया जा रहा है। इसके लिए एफसीए की अनुमति अनिवार्य नहीं होती। वन विभाग ने जब बिजली बोर्ड से इस प्रकार की अधिसूचना की प्रतिलिपि मांगी तो वह उपलब्ध नहीं करवा पाए। इस कारण विभाग ने इस कार्य को चालू नहीं होने दिया। हालांकि, पांगी वासी विभाग और बोर्ड से मांग कर रहे हैं कि इस लाइन को डालने दिया जाए।
विधायक डॉक्टर जनकराज ने भी यह मुद्दा हाल ही में विधानसभा सत्र में भी उठाया था। इसमें उन्होंने सरकार से मांग की थी कि लाइन के कार्य में जिस विभाग ने लापरवाही बरती है, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। यही वजह है कि जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी ने विभागीय और प्रशासनिक अधिकारियों को शिमला बुलाया है। अब देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या होता है।