मतदाता सूची में पत्नी का नाम न होने से चुनाव लड़ने का सपना टूटा
शादी के बाद नहीं कटवाया नाम, अब चुनाव लड़ने से रह गए महरूम
जिला चंबा के करीब दस पंचायतों में सामने आई ऐसी ही समस्या
पंकज सलारिया
चंबा। जिले की पंचायतों में चुनावी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। चुनावी माहौल के बीच कई घरों में रणनीति नहीं, मायूसी लिखी जा रही है। प्रधान की कुर्सी तक पहुंचने का सपना एक छोटी सी प्रशासनिक चूक में उलझ गया है।
महिलाओं के लिए आरक्षित पंचायतों में पत्नी का नाम मतदाता सूची में नहीं होने से दिक्कतें बढ़ गई हैं। जिन पत्नियों को चुनाव मैदान में उतारने की पूरी तैयारी थी, वे अब कागजों की एक कमी के चलते बाहर हो गई हैं।
महिलाओं के लिए आरक्षित पंचायतों में पत्नी का नाम वोटर लिस्ट में न होने के कारण उनका चुनाव लड़ने का सपना टूट गया है। पंचायत महिला आरक्षित होने से पति इस बात से परेशान हैं कि वे पत्नी को पंचायत प्रधानगी और वार्ड मेंबर के पद पर चुनाव कैसे लड़वाएं। जिले की करीब दस पंचायतों में ऐसी स्थिति बन गई है। रोस्टर जारी के बाद पंचायतों में प्रधान पद महिलाओं के लिए आरक्षित हो गया है। पतियों ने अपनी पत्नियों का नाम मायका पक्ष वाली पंचायत से नहीं कटवाया है। इस लिहाज से ये महिलाएं अपना वोट नहीं डाल सकती हैं और न ही पंचायत चुनावों में दावेदारी ठोंक सकती हैं। लिहाजा, पति अब इस बात से परेशान है कि वे कैसे अपनी पत्नी को पंचायत चुनावों में उतारें। हालांकि, इसके लिए वे संबंधित पंचायत सचिव से भी बात कर रहे हैं मगर मतदाता सूचियां तैयार होने के चलते अब यह असंभव है। बहरहाल, पत्नी को पंचायत चुनावों में उतार प्रधान बनाने का सपना ऐसे पतियों का चूर-चूर हो गया है। सुरेश कुमार, राजेश कुमार, सुनील कुमार, अमित कुमार, परमेश कुमार, विक्की कुमार ने बताया कि अक्तूबर 2025 में उनकी शादी हुई थी मगर अब तक पत्नी का नाम मायका पक्ष वाली पंचायत में है। महिला आरक्षित पंचायत है। ऐसे में चुनाव लड़ने में पत्नी का वोट ससुराल पक्ष की पंचायत में होना जरूरी है।
गौरतलब है कि प्रदेश में पंचायत चुनावों का बिगुल कभी भी बज सकता है। रोस्टर जारी होने के बाद चुनावी चर्चाएं तेज हो गई हैं। एक तरफ जहां चुनावी समीकरण बनाएं जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विरोधियों को पछाड़ने के लिए चौराहों पर रणनीतियां तैयार हो रही है। रोस्टर जारी होने के बाद चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। संवाद