चंबा में छाते, रेनकोट और तिरपाल के दामों में आया 30 फीसदी तक उछाल
डीजल के दाम बढ़ने से महंगा हुआ सामान, ग्राहकों को ढीली करनी पड़ रही जेब
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। बारिश की फुहार के बीच चंबा के बाजारों में छाते और रेनकोट राहत बनकर नहीं, बल्कि महंगे खर्च का नया हिसाब लेकर उतर आए। बारिश से बचाव का यह जरूरी सामान इस बार करीब 30 फीसदी तक महंगा हो चुका है।
इसकी वजह मौसम नहीं, बल्कि पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल और डीजल की बढ़ती लागत है। नतीजा यह है कि आसमान की बारिश जहां ठंडक दे रही है, वहीं बाजार की महंगाई लोगों की जेबों को पहले ही भिगो रही है।
पिछले साल की तुलना में इन वस्तुओं के दामों में करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। दुकानदारों ने कहा कि छाते, रेनकोट और तिरपाल के निर्माण में प्रयुक्त प्लास्टिक, फाइबर और अन्य सिंथेटिक सामग्री पेट्रोलियम उत्पादों पर आधारित होती है। कच्चे माल की बढ़ी कीमतों के साथ परिवहन लागत में हुए इजाफे ने बाजार में इन उत्पादों को महंगा कर दिया है। शहर में साधारण तिरपाल 500 रुपये में उपलब्ध है। बड़े आकार की तिरपाल की कीमत 3 हजार रुपये तक पहुंच गई है। छाते 300 से 1200 रुपये तक बिक रहे हैं। पिछले वर्ष जो छाता 300 रुपये में था, उसकी कीमत 450 रुपये तक पहुंच गई है।
पहाड़ी क्षेत्रों में सामान पहुंचाने का खर्च पहले ही अधिक रहता है। अब डीजल के दाम बढ़ने से ट्रांसपोर्ट चार्ज भी बढ़ गए हैं। कंपनियों से महंगा सामान मिल रहा है, इसलिए बाजार में कीमतें बढ़ चुकी हैं। - शैंकी कपूर
रेनकोट, तिरपाल और छातों में इस्तेमाल होने वाली अधिकांश सामग्री प्लास्टिक और सिंथेटिक फाइबर की होती है। कच्चे माल की कीमत बढ़ने से कंपनियों ने रेट बढ़ा दिए हैं। इसका असर दुकानदारों और और ग्राहकों पर पड़ा है। - जसवीर नागपाल
बारिश के मौसम में छाता और रेनकोट लोगों की जरूरत बन जाते हैं। ग्राहक कीमतें पूछकर जरूर हैरान होते हैं लेकिन मौसम को देखते हुए खरीदारी भी कर रहे हैं। उन्हें भी महंगे दामों से खरीदने पड़ रहे हैं। - आदी
पिछले वर्ष की तुलना में लगभग हर उत्पाद महंगे हुए हैं। खासकर बड़े साइज की तिरपाल और मजबूत क्वालिटी वाले छातों की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। इसका असर दुकानदारी पर पड़ रहा है। - विक्की