चंबा। शहर के वार्डों से कूड़ा उठाने के बाद नगर परिषद की गाड़ी भरमौर चौक पर रातभर खड़ी रहती है। सुबह होते ही यह गाड़ी खाली हो चुकी होती है। अब यह कचरा कहां जाता है, यह सवाल लोगों के बीच पहेली और चर्चा का विषय बन चुका है।
स्थानीय निवासी विनोद कुमार, गुरमीत सिंह, सुरेश ठाकुर, बीर सिंह, सुरेंद्र ठाकुर, संजय शर्मा, महिंद्र सिंह और नरेश कुमार ने बताया कि रात होने तक कचरे की गाड़ी शहर से बाहर नहीं जाती तो अगली सुबह उसमें भरा कचरा कहां ठिकाने लगाया जा रहा, यह काफी चिंता का विषय है। इसमें प्रशासन को गंभीरता दिखाने की जरूरत है।
आसपास के इलाकों में नदी और नालों के किनारे कचरे का ढेर लग चुका है। उन्होंने आशंका जताई है कि अगर कचरा कूड़ा संयंत्र तक नहीं पहुंच रहा तो इसका ठिकाना आखिरकार नदी और नालों में ही लगाया जा रहा होगा।
जानकारी के अनुसार कुरांह स्थित कूड़ा संयंत्र केंद्र लंबे समय से बंद पड़ा है, क्योंकि वहां लगीं मशीनें आग की चपेट में आकर जल चुकी हैं। वहीं, मरेड़ी में जहां कचरे के निष्पादन की व्यवस्था की गई थी, वहां भी स्थानीय लोग आपत्ति जता रहे हैं। इस स्थिति में रोजाना टनों कचरा इकट्ठा होने के बावजूद उसका उचित निष्पादन नहीं हो पा रहा है।
शहरवासियों का कहना है कि यदि समय रहते कचरे के निष्पादन की उचित व्यवस्था नहीं की गई तो इसका प्रतिकूल असर आसपास के पर्यावरण पर पड़ेगा। नदी और नालों में कचरे का बढ़ता ढेर जल, वायु, और मृदा प्रदूषण का कारण बन सकता है, जिससे यहां के प्राकृतिक संसाधनों पर भारी दबाव पड़ेगा।
खुले में कचरा फेंकना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। यदि नगर परिषद की ओर से नदी और नालों में कचरा फेंका जा रहा है, तो इसके खिलाफ जांच की जाएगी और कार्रवाई की जाएगी। राहुल शर्मा, सहायक अभियंता, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड