भरमौर (चंबा)। भरमौर के कुगति में स्थित कार्तिक स्वामी मंदिर के कपाट 14 अप्रैल यानी संक्रांति वाले दिन 134 दिन के बाद श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुलेंगे। कपाट सुबह 10:00 बजे खोले जाएंगे। मंदिर के कपाट खोलने से पहले हवन, भजन-कीर्तन और कपाट पूजन की की रस्म अदा होगी। इस दौरान मंदिर के गर्भगृह में रखी पानी की गढ़वी भी आगामी एक वर्ष तक क्षेत्र के सुख समृद्धि या अकाल जैसी स्थिति से भी परदा उठाएगी।
गौरतलब है कि हिमाचल के जिला चंबा के जनजातीय इलाके भरमौर में आज भी लोग विज्ञान पर भरोसा करने के बजाय देवताओं की शरण में जाते हैं। देवता सालभर के मौसम की भविष्यवाणी करते हैं। लोग भी इसे मानते हैं और उसी अनुरूप फसलों की देखरेख और जीवनयापन करते हैं। ऐसा सदियों से चला आ रहा है। कबायली क्षेत्र भरमौर के कुगति में उत्तर भारत का प्रसिद्ध शिव पुत्र कार्तिक देव का मंदिर है। हर साल 30 नवंबर को कार्तिक स्वामी मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं। कपाट बंद करने से पहले मंदिर के गर्भगृह में मूर्ति के सामने पानी से भरी एक गड़वी (कलश) को रखा जाता है। इस बार भी ऐसा ही किया गया है। यदि कलश आधा भरा मिला तो कम बारिश की संभावना रहती है और कलश में पानी पूरा सूखा पाया गया तो अकाल जैसी स्थिति इलाके में आने की संभावना रहती है। मान्यता है कि कार्तिकेय स्वामी के मंदिर में सच्चे मन से मांगी गई मुराद अवश्य ही पूरी होती है। कार्तिकेय मंदिर के पुजारी मचलू राम शर्मा ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि 13 अप्रैल को कोई भी श्रद्धालु मंदिर में न आए। सभी श्रद्धालु रात को कुगति गांव में ही रहें और शिव पूजन में हिस्सा लें।