एक साल के प्रशिक्षण केंद्र में 10 महिलाएं सीख रहीं हैंडलूम बुनाई, हर प्रशिक्षु को 2400 रुपये मासिक स्टाइपेंड और टूल किट
प्रशिक्षण के बाद घर से शुरू कर सकेंगी काम, कला को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ स्वरोजगार से जोड़ने की पहल
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। चंबा की पारंपरिक पहचान और हस्तकला की विरासत से जुड़ी चंबा शॉल की बुनाई अब होली की महिलाओं के हाथों में नई पहचान पा रही है।
पारंपरिक हैंडलूम कला को सहेजने और स्थानीय महिलाओं को रोजगार के लिए हुनरमंद बनाने के उद्देश्य से हैंडलूम हैंडीक्राफ्ट कारपोरेशन चंबा की ओर से होली पंचायत में प्रशिक्षण केंद्र शुरू किया गया है। केंद्र में वर्तमान में 10 महिलाएं चंबा शॉल की हैंडलूम बुनाई का प्रशिक्षण ले रही हैं।
प्रशिक्षण की अवधि एक वर्ष निर्धारित की गई है। इस दौरान महिलाओं को हैंडलूम पर चंबा शॉल तैयार करने की पूरी प्रक्रिया और बुनाई की बारीकियां व्यावहारिक रूप से सिखाई जाएंगी। प्रशिक्षण के साथ प्रत्येक प्रशिक्षु को 2400 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जाएगा। इसके अलावा महिलाओं को आवश्यक टूल किट भी उपलब्ध करवाई जाएगी, ताकि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद वे अपने स्तर पर इस हुनर को आगे बढ़ा सकें।
प्रशिक्षण केंद्र में महिलाओं को प्रशिक्षण देने वाले इंस्ट्रक्टर को 7500 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद महिलाएं घर से भी चंबा शॉल की बुनाई का काम शुरू कर इसे स्वरोजगार का जरिया बना सकेंगी।
हैंडलूम हैंडीक्राफ्ट कारपोरेशन चंबा के प्रभारी शीतल कुमार ने बताया कि चंबा शॉल केवल हस्तकला नहीं, बल्कि जिले की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी पारंपरिक कला है। होली में शुरू किया गया प्रशिक्षण केंद्र इस हुनर को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के साथ महिलाओं को आगे काम करने के लिए जरूरी साधन भी उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।