नकरोड़ (चंबा)। उत्तराखंड की तरह चंबा के चुराह में भी प्रकृति तबाही मचा सकती है। चुराह में पहाड़ों में उगने वाली औषधीय झाड़ियों को जड़ों सहित उखाड़कर बेचा जा रहा है। इससे पहाड़ों का सीना छलनी हो रहा है।
यह भूमि कटाव का कारण बन सकता है। इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए झज्जाकोठी पंचायत के प्रधान विपिन कुमार ने वन विभाग की भूमि से उखाड़ी जा रही कशमल की जड़ों को रोकने के लिए नागरिक उपमंडल अधिकारी चुराह को ज्ञापन सौंपा है। चेतावनी भी दी है कि यदि प्रशासन और वन विभाग ने वन भूमि से कशमल की जड़ों को निकालने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की तो मुख्यमंत्री और उपायुक्त से शिकायत की जाएगी। उनका कहना है कि रोजाना ट्रकों के हिसाब से चुराह के जंगलों से कशमल के पौधे जड़ों सहित उखाड़कर बाहरी राज्यों में भेजे जा रहे हैं। कई जगह सड़क किनारे जड़ों के बड़े-बड़े ढेर लगाए गए हैं। कहा कि अंधाधुंध तरीके से कशमल की जड़ें उखाड़ी जाती रहीं तो आने वाले समय में जंगल से इन पौधों का नामोनिशान मिट जाएगा। भूमि पर इन पौधों की जड़ों के कारण बनी पकड़ कमजोर हो जाएगी। इसकी वजह से पहाड़ों पर भूमि कटाव हो सकता है। उधर, एसडीएम चुराह जोगिंद्र पटियाल ने बताया कि इस मामले में उचित कार्रवाई करने के लिए उन्होंने वन विभाग को निर्देश जारी कर दिए हैं।