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Chamba News: स्विच यार्ड मलबे में दबा... मानसून के साथ लौटा अंधेरे का डर

Sat, 04 Jul 2026 10:50 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
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मलबे के निचे दबा स्विच यार्ड, मैहला ग्राउंड रिपोर्ट के साथ
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बरसात में फिर बिजली संकट के आसार, तकनीकी टीम यार्ड स्थानांतरण की दे चुकी है सलाह
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साल 2025 में आई तबाही से नहीं लिया सबक, जरंगला-रजेरा स्विच यार्ड आज भी खतरे में
भुवनेश सिंह
मैहला (चंबा)। एक साल पहले जिस स्विच यार्ड को बरसात की तबाही ने मलबे में दफन कर दिया था, वह आज भी उसी खतरे के साये में खड़ा है।
तकनीकी चेतावनियां फाइलों में कैद हैं। मानसून फिर दस्तक दे चुका है। ऐसे में जरंगला-रजेरा स्विच यार्ड से जुड़े हजारों उपभोक्ताओं को डर है कि कहीं 2025 जैसा लंबा बिजली संकट एक बार फिर उनकी जिंदगी को अंधेरे में न धकेल दे।
वर्ष 2025 में भारी बारिश के दौरान स्विच यार्ड में मलबा आने से बिजली व्यवस्था चरमरा गई थी। कई पंचायतों में 15 से 25 दिन तक बिजली बंद रही थी। एक वर्ष बाद भी यार्ड को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने का कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
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बीते वर्ष आया मलबा अब भी यार्ड के आसपास जमा है। कई हिस्से मलबे के नीचे दबे हैं। बरसात में तेज हवा या खराब मौसम में भी बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती है। पिछले वर्ष तकनीकी टीम ने निरीक्षण के बाद स्विच यार्ड को असुरक्षित बताते हुए सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की सिफारिश की थी। बावजूद इसके न तो स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू हुई और न ही स्थायी समाधान के लिए ठोस कदम उठाया गया। स्विच यार्ड के तहत गागला, मैहला, जांघी, बकाणी, गुराड, चंडी, धिमला, बंदला, फागड़ी और दाड़वीं पंचायतों सहित सैकड़ों परिवारों को बिजली आपूर्ति की जाती है।
बिजली बोर्ड के सहायक अभियंता तेजू राम ने बताया कि जरंगला-रजेरा स्विच यार्ड को टीम ने निरीक्षण किया है। जल्द ही इस समस्या का समाधान किया जाएगा।

पिछले साल 15-25 दिन तक बिजली नहीं थी। इस बार भी वही हालात बन रहे हैं। हल्की हवा चलने पर भी बिजली चली जाती है। कई बार बोर्ड को शिकायत दी लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ। - विकास कुमार, मैैहला

बार-बार बिजली गुल हो जाने से बच्चों की पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित होती है। बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को रात में अंधेरे में पढ़ना पड़ता है। - परविंदर कुमार, मैहला

तकनीकी टीम ने पिछले साल स्विच यार्ड को असुरक्षित बताकर इसे शिफ्ट करने की बात की थी। कोई कार्रवाई नहीं हुई। हर साल परेशानी उठानी पड़ रही है। बोर्ड को काम करना चाहिए। - अक्षय कुमार, मैहला
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जरंगला-रजेरा स्विच यार्ड की स्थिति बड़े हादसे को न्योता दे रही है। रहते यार्ड को सुरक्षित स्थान पर नहीं ले जाया गया और मलबा नहीं हटाया तो कई पंचायतों में बिजली कटौती झेलनी पड़ेगी। - भूपिंद्र सिंह जसरोटिया, मैहला
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