भरमौर (चंबा)। संचूई के शिव चेले दो दिन तक चौरासी परिसर भरमौर में मणिमहेश यात्रियों को आशीर्वाद देने के बाद सोमवार को डल झील के लिए रवाना हुए। मंगलवार को दोपहर 12:30 बजे के बाद ये चेले डल (पार करना) तोड़ने की रस्म का निर्वहन करेंगे। इसकी अगुवाई शिव पुत्र कार्तिक स्वामी का चेला करेगा। डल तोड़ने की रस्म के बाद रात को राधाष्टमी का पवित्र स्नान शुरू होगा।
चौरासी परिसर भरमौर से सोमवार को संचुई शिव चेलों की छड़ी डल झील के लिए रवाना हुई। कुगति से कार्तिक स्वामी के चेले की छड़ी भी डल झील के लिए रवाना हो गई है। इससे पहले दशनामी अखाड़ा और चरपट नाथ की छड़ियां भी मणिमहेश के लिए कूच कर चुकी हैं। सोमवार को ये चारों छड़ियां धन्छौ में रात्रि विश्राम करेंगी। मंगलवार सुबह चारों छड़ियां एक साथ डल झील के लिए रवाना होंगी। धन्छौ में चारों छड़ियों को एक साथ देखने के लिए श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रहेगी। हर वर्ष ये चारों छड़ियां धन्छौ में एकत्रित होती हैं। यहां से आगे का रास्ता चारों छड़ियां एक साथ तय करती हैं। संचूई शिव चेले चौरासी परिसर में दो दिन तक इसलिए रुकते हैं, जिससे मणिमहेश जाने वाले श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दे सकें। इतना ही नहीं, मणिमहेश जाने से पहले श्रद्धालु इन चेलों से अनुमति भी लेते हैं। यदि किसी श्रद्धालु को यात्रा पर नहीं जाने के लिए ये चेले बोल दें तो वह श्रद्धालु यात्रा पर नहीं जाता है। राधाष्टमी के बड़े न्हौण (स्नान) के लिए हजारों श्रद्धालु मणिमहेश के लिए रवाना हो रहे हैं।