बेटे और बहू के शवों को देखकर बेसुध हो गईं 70 वर्षीय डोलमू
साइट स्टोरी
संवाद न्यूज एजेंसी
चुराह (चंबा)। रिश्तेदारी में हुई मौत का अफसोस करने निकले एक परिवार के दो सदस्यों की मौत पूरे परिवार को ताउम्र न भूलने वाले गहरे जख्म दे गई। किसी को भी यह भरोसा नहीं हो रहा है कि हिमगिरी के लिए कार में सवार होकर शुक्रवार सुबह 9:00 बजे निकले जेठ और भाभी (छोटी बहू) के शव दोपहर बाद सफेद कफन में लिपटे घर पहुंचेंगे। हादसे की खबर मिलते ही पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया। वहीं, लोकमित्र केंद्र और फोटोग्राफी का कारोबार कर परिवार का भरण पोषण करने वाले अशोक कुमार के पैर तले जमीन ही खिसक गई। उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था कि कुछ ही समय पूर्व हंसी-खुशी घर से निकलने वाले बड़े भाई और पत्नी की हादसे में मौत की खबर आने वाली है। हादसे के बाद परिजन और ग्रामीण दौड़े-दौड़े घटनास्थल पर पहुंचे। पूरा गांव चीख-पुकार से गूंज उठा। सफेद कफन में लिपटे बेटे और बहू के शवों को देखकर 70 वर्षीय डोलमू देवी पत्नी हुकम चंद गश खाई गिर पड़ीं। घर के आंगन में एकत्रित हुईं गांव की महिलाओं ने बुजुर्ग महिला को सहारा देकर दीवार के साथ बिठाया। ढांढस बंधाती हुईं महिलाएं बुजुर्ग को अब मृतकों के बच्चों का हवाला देते हुए उसे हौसला बंधाने की कोशिश करती नजर आईं।
कार हादसे में मौत का ग्रास बनी रूपा देवी पत्नी अशोक कुमार का बड़ा बेटा प्रिंस नेगी 11वीं कक्षा और छोटी बेटी प्रियंका सातवीं कक्षा में बनीखेत स्थित स्कूल में पढ़ाई कर रही हैं। हादसे में मां की मौत की खबर से दोनों बच्चों का रो-रो कर बुरा हाल है। वहीं, हादसे में जान गंवाने वाले भूरी सिंह जल शक्ति विभाग में बतौर फीटर कार्यरत थे। अपने पीछे वह पत्नी बंती देवी, बेटा राकेश कुमार, बहू और पोती छोड़ गए हैं। मृतक का बेटा एनएचपीसी में आउटसोर्स पर कार्यरत बताया जा रहा है। हादसे में पिता की मौत के बाद अब घर की सारी जिम्मेदारी उसके कंधों पर आ गई है। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे परिवार को कभी न भूलने वाले गहरे जख्म दिए हैं।