खड़ामुख से उलांसा के लिए बन रहे वैकल्पिक मार्ग के निर्माण का मलबा रावी में फेंका जा रहा है। पिछले करीब पंद्रह दिन से शुरू हुए इस कार्य के दौरान हजारों टन मलबा रावी में फेंक दिया गया। वन विभाग ने मलबा फेंकने के लिए जगह चिह्नित कर रखी है। ठेकेदारों ने नियमों को नजरअंदाज करते हुए इस कार्य को अंजाम दिया है।
गरोला के पास इस सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसे स्थानीय स्तर पर ठेकेदार अंजाम दे रहे हैं। कंपनी ने करीब आधा दर्जन ठेकेदारों को काम का जिम्मा सौंपा था जबकि वन विभाग ने मार्ग निर्माण की मंजूरी देते हुए इससे निकलने वाले मलबे को फेंकने के लिए जगह निश्चित कर दी थी। करीब पंद्रह दिन से यहां काम जारी है और मलबा गिराने की वजह से पहाड़ी पर खाई जैसे हालात बन गए हैं। जिस जगह से मलबा फेंका गया है वहां कई पेड़ भी उखड़ कर नदी में पहुंच गए हैं।
भविष्य में यहां भारी भूस्खलन की भी संभावना बनी हुई है। वन विभाग की लेटलतीफी से उनकी कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। करीब दो हफ्ते से काम जारी होने के बावजूद विभाग ने इसकी सुध नहीं ली। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जिस जगह काम चल रहा है वो मुख्य मार्ग से काफी दूर है और वहां ध्यान कम ही जाता है। लोगों की शिकायत मिलते ही विभाग हरकत में आया और मौके पर पहुंचकर कंपनी के ठेकेदारों को मलबा रावी में न फेंकने की नसीहत दी है। हालांकि वन विभाग ने काम बंद नहीं करवाया है।
नुकसान का आकलन कर रहा वन विभाग : डीएफओ
वन मंडल अधिकारी भरमौर सुमन औहरी का कहना है कि गरोला में रावी में मलबा फेंका गया है। इसकी सूचना मिलते ही पूरी टीम मौके पर गई थी और अब मलबा फेंकने से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। करीब एक दिन के बाद आकलन पूरा कर लिया जाएगा और ठेकेदार पर मलबे के हिसाब से जुर्माना लगाया जाएगा। उन्होंने बताया कि भविष्य में रावी नदी में मलबा फेंका गया तो विभाग कड़ी कार्रवाई करेगा।