फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chamba News: पांगी में समय से पहले बर्फबारी ने सेब बागवानों की तोड़ी कमर

Wed, 08 Oct 2025 12:03 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
विज्ञापन
विज्ञापन
पांगी (चंबा)। जनजातीय क्षेत्र पांगी में सीजन की पहली बर्फबारी बागवानों के लिए मुसीबत बन गई है। घाटी के 50 फीसदी बागवानों ने अभी अपने बगीचों से सेब की फसल निकालनी थी, लेकिन बर्फबारी होने से उनकी फसल बर्बाद हो गई। बर्फबारी के कारण सेब पेड़ से झड़ कर जमीन पर गिर गए। बागवानों को आर्थिक नुक्सान हुआ है। जिस फसल को देख बागवान बढि़या दाम मिलने की उम्मीद लगा रहे थे। अब उसी फसल को देखकर उन्हें रोना आ रहा है। क्योंकि, अब इस फसल को कोई भी नहीं खरीेदेगा। पांगी का सेब जिले के अन्य क्षेत्रों की तुलना में थोड़ा देरी से तैयार होता है। हालांकि, इस सेब की डिमांड काफी अधिक रहती है।
विज्ञापन


बागवानों में इंद्रदेव, सुरेंद्र, वीर राणा, थान सिंह, प्रेम चंद और सुरेश कुमार ने बताया कि रविवार और सोमवार को हुई बर्फबारी के कारण पांगी में सेब की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। यदि सरकार ने बागवानों को इस नुक्सान के बदले में आर्थिक सहायता प्रदान नहीं की तो उन्हें अपना परिवार पालना मुश्किल हो जाएगा। क्योंकि, सेब की फसल से होने वाली कमाई से ही उनके परिवार का भरण पोषण होता था।


पेड़ों से झड़कर जमीन पर गिरे सेब, बागवानों को भारी आर्थिक नुकसान, राहत की आस
संवाद न्यूज एजेंसी
पांगी (चंबा)। जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी में हुई सीजन की पहली बर्फबारी यहां के बागवानों पर कहर बनकर टूटी है। जहां एक ओर लोग बर्फबारी का लुत्फ उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बागवानों की सालभर की मेहनत चंद घंटों में बर्बाद हो गई। घाटी के करीब 50 फीसदी से अधिक बागवानों ने अभी सेब की फसल का तूड़ान करना थी, लेकिन बर्फबारी ने सेब के पेड़ों को झकझोर दिया और फल जमीन पर गिर गए।
विज्ञापन

स्थानीय बागवानों ने बताया कि बर्फ और नमी के चलते गिरे हुए सेब अब बाजार में बिकने लायक नहीं बचे। जिस फसल से उन्हें अच्छी कमाई की उम्मीद थी, अब उसी फसल को देखकर दिल टूट रहा है। पांगी घाटी का सेब अन्य क्षेत्रों की तुलना में थोड़ी देरी से तैयार होता है, लेकिन इसकी बाजार में डिमांड काफी अच्छी रहती है। इस बार बागवानों को उम्मीद थी कि उन्हें अच्छे दाम मिलेंगे, लेकिन बर्फबारी ने सारी योजना पर पानी फेर दिया।
बागवान इंद्रदेव, सुरेंद्र, वीर राणा, थान सिंह, प्रेम चंद और सुरेश कुमार का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द कोई राहत पैकेज नहीं दिया, तो उनके परिवार के लिए आर्थिक संकट गहराना तय है। क्योंकि अधिकांश परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन यही सेब की फसल है। बागवानों ने प्रशासन और राज्य सरकार से गुहार लगाई है कि वे जल्द से जल्द क्षति का सर्वे करवाकर मुआवज़ा घोषित करें, ताकि बर्बाद फसल के बाद भी परिवारों की आजीविका बचाई जा सके।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें