चंबा। जिले के किसानों को दिसंबर के पहले सप्ताह में आलू का बीज उपलब्ध करवाया जाएगा। किसानों को आलू के बीज के लिए ज्यादा भटकना नहीं पड़ेगा।
आलू के बीज पर 25 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर बीज का वितरण किया जाएगा। दिसंबर और जनवरी में जिला चंबा के किसान अपने खेतों में आलू की बिजाई करते हैं। जिले में रबी मौसम में लगभग 120 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की खेती की जाती है।
जानकारी के अनुसार इस वर्ष जिला चंबा के लिए कुफरी ज्योति किस्म का 1750 क्विंटल आलू का बीज मंगवाया गया है। सरकार की ओर से आलू के बीज का मूल्य भी तय कर दिया गया है। कृषि निदेशालय की ओर से जिला चंबा के लिए मांग के अनुसार आलू के बीज का आवंटन भी कर दिया है। दिसंबर महीने के पहले सप्ताह में बीज कृषि विभाग के विक्रय केंद्रों में उपलब्ध हो जाएगा। गौरतलब है कि रबी मौसम में आलू की खेती मुख्यतया विकास खंड सलूणी, तीसा और चंबा में की जाती है। इन विकास खंडों के मुकाबले अन्य विकास खंडों में आलू की खेती के तहत क्षेत्रफल कम है। रबी मौसम में जिला चंबा के विकास खंड सलूणी में सबसे अधिक लगभग 80 हेक्टेयर क्षेत्रफल आलू की खेती की जाती है।
इनसेट
कृषि उपनिदेशक चंबा डॉ कुलदीप धीमान ने बताया कि बारिश हो जाने के कारण खेतों में पर्याप्त नमी भी हो गई है। अब किसान आलू की बिजाई के लिए अपने खेत तैयार कर सकते हैं। खेतों की जुताई करते समय प्रति बीघा में 20 क्विंटल गली सड़ी देसी खाद खेतों में डाल कर मिट्टी के साथ मिलाएं। इससे अधिक पैदावार लेने के लिए 20 किलोग्राम यूरिया, 40 किलोग्राम 12:32:16 तथा 8 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति बीघा की दर से डालें।
ऐसे करें बिजाई
बिजाई के समय पंक्ति से पंक्ति की दूरी 2 फुट तथा कंद से कंद की दूरी 8 इंच रखें। इस प्रकार एक बीघा में आलू की बिजाई के लिए 2 क्विंटल बीज आलू की आवश्यकता होती है। खरपतवर नियंत्रण के लिए बिजाई के एक महीने बाद आलू के खेतों की गुड़ाई करें और यदि बीज आलू के अंकुरण से पहले खरपतवार अधिक उग जाएं तो खरपतवार नाशी दवाई का स्प्रे करें।