साहो (चंबा)। कीड़ी पंचायत के गांव सरोल, लग्गा, मतियारा, खलनेरा, मंगरोल, चूल्ला, कीड़ी, चचौह में आज भी किसान हल जोत कर मक्की बिजाई का कार्य करना पसंद करते हैं। हालांकि, बदलते परिवेश में अब बैलों की जगह मशीनों ने ले ली है। बावजूद इसके क्षेत्र के ग्रामीण आज भी पुश्तैनी तरीके से ही मक्की बिजाई के कार्य को अंजाम दे रहे हैं। इतना ही नहीं किसानों की ओर से बाजार से मक्की खरीद कर बीज लाने के बजाए देशी बीज का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। किसानों का तर्क है कि उनके पास संचित कर रखे गए मक्की के बीज से फसल बेहतर होगी। बाजार से खरीद कर लाने वाले बीज से फसल और घास तक नहीं होती है।
किसानों अमी चंद, ठाकुर सिंह, कमलेश कुमार, हेमराज, पवन कुमार, नरेश कुमार,अमरो राम, कर्म चंद ने बताया कि खेतों में हल के जरिये की खेतों की गुढ़ाई से लेकर बिजाई के कार्य को अंजाम दिया जाता है। किसान आज भी पुश्तैनी तरीके से खेतों की गुढ़ाई और बिजाई का कार्य करना उचित मानते हैं। किसानों के मुताबिक खेतों में मशीन से गहरी खुदाई नहीं हो पाती है। हल चलने से खेतों में गहरी खोदाई के साथ-साथ बेहतर मिट्टी की व्यवस्था होती है।