पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत, चेलों को शॉल-टोपी और रुद्राक्ष माला पहनाकर किया सम्मानित
दो दिन भरमौर में रहेगा धार्मिक डेरा, भर्माणी माता और चौरासी परिसर में करेंगे देवदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
भरमौर (चंबा)। भद्रवाह से आए जत्थों के भरमौर पहुंचते ही सोमवार को हेलीपैड का स्वरूप बदल गया। अपने साथ लाए शिव चिह्नों को हेलीपैड पर स्थापित कर जत्थों ने दो दिन के पारंपरिक धार्मिक पड़ाव की शुरुआत की। मणिमहेश न्यास की ओर से पुष्पवर्षा कर जत्थों का स्वागत किया गया। जत्थों की अगुवाई करने वाले चेलों को शॉल, टोपी और रुद्राक्ष की माला पहनाकर सम्मानित किया गया।
भद्रवाह के जत्थों के पहुंचने पर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। शिव चिह्नों की स्थापना के बाद हेलीपैड पर धार्मिक गतिविधियां शुरू हो गईं। जत्थों के साथ पहुंचे श्रद्धालु दो दिन तक भरमौर में ठहरेंगे। इस दौरान भर्माणी माता मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ चौरासी परिसर में विराजमान देवी-देवताओं के दर्शन किए जाएंगे।
भद्रवाह के जत्थों का भरमौर में ठहराव वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। इसी परंपरा के तहत जत्थे यहां रुककर स्थानीय देवी-देवताओं के दर्शन करते हैं। इस बार भी परंपरा के अनुरूप हेलीपैड पर शिव चिह्न स्थापित किए गए हैं। न्यास की ओर से किए गए स्वागत से श्रद्धालु भी अभिभूत नजर आए और उन्होंने इस पहल की सराहना की।
सोमवार सुबह 10 बजे तक भरमौर से गौरीकुंड के लिए हेलिकाप्टर उड़ानें हुईं। जत्थों के पहुंचने के बाद दोनों हेलिकाप्टरों को हेलीपैड के किनारे सुरक्षित खड़ा कर कपड़े से ढक दिया गया। जत्थों के हेलीपैड पर रहने तक हेली टैक्सी सेवाएं बाधित रहेंगी।
नागरिक उपमंडल अधिकारी अजय कुमार सिंह ने बताया कि भद्रवाह के जत्थों के हेलीपैड पर ठहरने तक हेली टैक्सी सेवाएं बाधित रहेंगी। प्रशासन ने धार्मिक परंपरा को देखते हुए हेली टैक्सी कंपनी को पहले ही इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए थे।