चंबा। नगर परिषद चंबा के दायरे में आने वाले जंजघर का अब निर्धन परिवारों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। नगर परिषद चंबा इसे अब किराये पर देकर खूब चांदी कूट रही है। नतीजतन, लोगों को घरों में खुली जगह न होने की बजह से महंगे दाम पर पैलेस बुक करवाकर समारोह करवाने पड़ रहे हैं। इससे सीधे तौर पर निर्धन परिवारों की सुविधा के लिए बनाए गए जंजघर का चंबावासियों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। हालांकि, एक समय यह जंजघर नगर परिषद की ओर से समारोह के आयोजन के लिए दिया जाता था। इसके बाद ठेकेदार को किराये पर देने और बाद में एक बैंक की ब्रांच को इसे किराये पर देकर नप चंबा ने झंझट ही खत्म कर दिया। ऐसी विकट परिस्थिति में अब प्रबुद्धजनों ने अपने स्तर पर हस्ताक्षर अभियान चलाकर नगर परिषद चंबा के इस कारनामे को प्रदेश सरकार तक पहुंचाने का मन बना लिया है।
शहरी से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक भवन बनाए गए हैं। बावजूद इसके चंबा शहर में निर्धन परिवारों को समारोह करवाने के लिए जंजघर बंद है। नगर परिषद वर्ष 2012-13 से पहले इसे समारोहों के लिए देती थी। इसकी एवज में नप अमूमन 5,000 रुपये तक किराया लेती थी। वर्ष 2013 के बाद नगर परिषद ने जंजघर को समारोह के लिए किराये पर देना बंद कर दिया। जंजघर के प्रथम तल पर नप कार्यालय भी खुला। नप कार्यालय के जीर्णोद्धार होने पर प्रथम तल को स्टोर के रूप मेंं इस्तेमाल किया जाने लगा। 2006-2011 तक दूसरे और तीसरे तल को नप ने ठेकेदार को तीन लाख प्रति वर्ष किराये पर दे दिया। खैर तत्कालीन तहसीलदार के निर्देशानुसार पुलिस बल के जरिये जंजघर को खाली करवाया गया। इसके बाद अब बैंक शाखा को जंजघर किराये पर दे दिया गया है। ऐसे में जंजघर का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है।
नगर परिषद चंबा के कार्यवाहक कार्यकारी अधिकारी दिलीप सिंह ने बताया कि जंजघर का मामला ध्यान में लाया गया है। नप चंबा की हाउस की बैठक मेंं इस मुद्दे को रखकर इस पर निर्णय लिया जाएगा।