पंचायत में किसी भी तरह की जड़ी-बूटी को उखाड़ने से पहले पंचायत की अनुमति अनिवार्य होगी। किसी भी जड़ी-बूटी को उखाड़ने वाले को पंचायत को निश्चित रायल्टी देनी होगी जिससे पंचायत की आय बढ़ेगी।
यह खुलासा वनमंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने शुक्रवार को चंबा में जैव विविधता पर आयोजित एक कार्यशाला को संबोधित करत हुए किया। उन्होंने बताया कि जैव विविधता अधिनियम 2002 में बन चुका है। लेकिन बहुत सी पंचायतें अभी इसकी शक्तियों ने अनजान हैं। इसके लागू होने से जड़ी-बूटी के दोहन पर रोक लगेगी।
अधिनियम से पूर्व धड़ल्ले से जड़ी-बूटियों को उखाड़ा जा रहा था और पंचायत इस पर किसी तरह की रोक लगाने में सक्षम नहीं थी। इस कार्यशाला में जिला परिषद, पंचायत परिषद सदस्य, समस्त ग्राम पंचायत प्रधान, वन विभाग, मत्स्य, वानिकी, कृषि और पशुपालन विभाग के अधिकारियों को जैव विविधता अधिनियम और नियमों की अभिगम्यता और हितलाभ सहभाजन प्रावधानों को लेकर प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला में लगभग 300 प्रतिभागियों ने जैव विविधता अधिनियम 2002 तथा जैव विविधता नियम बारे प्रशिक्षण लिया। इस मौके पर जैव विविधता बोेर्ड के संयुक्त सदस्य सचिव कुनाल सत्यार्थी ने जैव विविधता अधिनियम 2002 और नियम पंचायती राज के प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण आवश्यकता बारे जानकारी दी। पर्यावरण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी निदेशक अजय कुमार लाल ने अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता के महत्व के बारे मे विस्तृत जानकारी प्रदान की। हिमाचल प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा प्रदेश में जैव विविधता अधिनियम 2002 कार्यान्वयन के लिए की जा रही गतिविधियों की जानकारी प्रतिभागियों को दी।
वन अरण्यपाल डीआर कौशल ने प्रतिभागियों को चंबा जिले के जैविक संसाधनों के संरक्षण व सतत उपयोग के लिए स्थानीय इकाई स्तर पर विकास विभागों विशेषकर वन विभाग के साथ मिलजुल कर कार्य करने का आह्वान किया। इस मौके जिला परिषद सदस्य अमित भरमौरी ने भी पंचायत प्रतिनिधियों को संबोधित किया।