पति को हर महीने पत्नी को दो हजार, नाबालिग पांच बच्चों को एक-एक हजार देने होंगे
घरेलू हिंसा के मामले में अदालत ने सुनाया फैसला, 17 अगस्त, 2023 से देनी होगी राशि
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। चुराह उपमंडल के एक गांव से जुड़े घरेलू हिंसा के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी तीसा की अदालत ने पत्नी और पांच बच्चों के पक्ष में फैसला सुनाया है।
अदालत ने पति के खिलाफ सुरक्षा आदेश जारी करते हुए पत्नी को दो हजार रुपये और पांचों नाबालिग बच्चों को एक-एक हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण राशि देने के आदेश दिए हैं। यह राशि दायर याचिका की तिथि 17 अगस्त 2023 से देय होगी।
अदालत में दायर याचिका में महिला ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2005 में मुस्लिम रीति-रिवाज से विवाह होने के बाद शुरुआती कुछ वर्षों तक पति का व्यवहार सामान्य रहा। बाद में वह दहेज की मांग करने लगा। विरोध करने पर उनके साथ मारपीट, गाली-गलौज और मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना की गई। आरोप था कि मई 2023 में पति ने उसे पांचों नाबालिग बच्चों सहित घर से निकाल दिया। याचिका में महिला ने यह भी कहा गया कि पति बढ़ई का काम करता है, उसके पास जमीन भी है। उसकी मासिक आय 40 हजार रुपये से अधिक है। ऐसे में 20 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण देने की मांग की गई थी।
प्रतिवादी ने अदालत में दायर जवाब में सभी आरोपों से इन्कार किया। उसका कहना था कि पत्नी का स्वभाव झगड़ालु है। वह माता-पिता के उकसावे में आकर विवाद करती थी। उसने स्वयं को मनरेगा मजदूर बताया और कहा कि उसकी मासिक आय केवल पांच से छह हजार रुपये है। उसने कभी दहेज की मांग नहीं की। मामले में दोनों पक्षों के साक्ष्य और गवाहों के बयान दर्ज किए गए। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर माना कि पत्नी घरेलू हिंसा की शिकार हुई है। हालांकि अदालत ने अलग निवास (रेजिडेंस ऑर्डर) की मांग स्वीकार नहीं की।